सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल सात जजों के पद रिक्त हैं, लेकिन सरकार को अब तक भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली कोलेजियम की ओर से एक भी सिफारिश नहीं भेजी गई है।
गत वर्ष 31 दिसंबर को जहां सुप्रीम कोर्ट में एक महज एक जज का पद रिक्त था, वहीं इसी महीने न्यायमूर्ति अनिल आर दवे के सेवानिवृत्त होने से यह आंकड़ा सात तक जा पहुंचा है। सरकार के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, बावजूद इसके अब तक खाली पड़े पद के लिए सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की ओर से सरकार को कोई सिफारिश नहीं आई है।
मालूम हो कि पिछले दिनों भारत के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने विभिन्न प्लेटफार्म पर हाईकोर्ट में जजों की कमी को लेकर सरकार को आड़े हाथ लिया है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इस वर्ष अब तक सरकार ने विभिन्न हाईकोर्ट में 120 नियुक्तियां की है। 1990 के बाद इतनी संख्या में नियुक्ति का यह दूसरा सर्वाधिक आंकड़ा है। सूत्रों के मुताबिक, आम तौर पर हर वर्ष औसतन करीब 80 जजों की नियुक्ति होती है, ऐसे में वर्तमान सरकार अपनी जिम्मेदारी को बखूबी अंजाम दे रही है।
देश के 24 हाईकोर्ट में जजों की संख्या 1079 होनी चाहिए। फिलहाल 649 जज हैं, जबकि 430 पद रिक्त हैं। वर्ष 2015 में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को चुनौती देने वाली याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण नियुक्तियां नहीं हो सकी, लेकिन गत वर्ष 31 दिसंबर के बाद से अब तक 370 प्रस्ताव सरकार को मिले, जिनमें से 328 पर सरकार ने कार्रवाई की। इनमें से 290 पर सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई की। इनमें से 99 को सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने नकार दिया।