रामपुर के नवाब का ताज जो बुधवार को लंदन में नीलाम होगा
लंदन में रामपुर के नवाब खानदान की अहम विरासत रहे दो ताजों की बुधवार को नीलामी होगी। नवाब के दोनों ताज आखिर कैसे लंदन पहुंच गए। लंदन की बड़ी कंपनी क्रिस्टीज द्वारा नीलामी का विज्ञापन जारी होने के बाद नवाब परिवार में खलबली मच गई है। इस मुद्दे पर पूरा नवाब खानदान एकजुट है। विधायक और रामपुर नवाब परिवार के काजिम अली खां उर्फ नावेद मियां ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
रामपुर राज्य के संस्थापक और प्रथम शासक नवाब फैजुल्लाह खां थे। नवाब फैजुल्लाह खां का जन्म 1733 में बरेली की आंवला तहसील में हुआ था। उन्होंने बाद में रामपुर को रियासत की राजधानी बनाया। इसके बाद दस शासकों ने रामपुर रियासत पर राज किया। रामपुर रियासत के अंतिम शासक नवाब रजा अली खां थे। देश में विलय होने वाली यह पहली रियासत थी, नवाब रजा अली खां का इंतकाल 6 मार्च 1966 को हो गया था। इसके बाद उनके बड़े बेटे नवाब मुर्तजा अली खां को खिताब याफ्ता (उत्तराधिकारी माना गया)।
रामपुर रियासत के समाप्त होने के बाद उनकी विरासत की महत्वपूर्ण चीजें भी रखी गई थीं। लेकिन इनकी बेशकीमती वस्तुएं हीरे जवाहरात भी थे, जिसमें अधिकांश बेशकीमती चीजें किसी दूसरे के हाथों में पहुंच गई थीं। इनमें रामपुर की रियासत पर बैठे शासकों के दो ताज भी गायब थे। यही ताज इंग्लैंड की राजधानी लंदन में 30 नवंबर को नीलाम किए जाएंगे।
ताज हासिल करने का प्रयास कर रहा नवाब परिवार
रामपुर के नवाब का ताज जो बुधवार को लंदन में नीलाम होगा
लंदन की क्रिस्टीज नाम की कंपनी जोकि विरासती सामान की ही नीलामी करती है, इसने 18 नवंबर को विज्ञापन भी जारी किया। रामपुर रियासत के मौजूदा खिताब याफ्ता नवाब काजिम अली खां उर्फ नावेद मियां ने अपनी फेसबुक वाल पर विज्ञापन का स्क्रीन शॉट लेते हुए नीलामी को अवैध करार दिया।
ताज हासिल करने का प्रयास कर रहा नवाब परिवार
हमारे परदादा के दोनों ताज लंदन की क्रिस्टीज कंपनी नीलाम कर रही है, यह ताज आखिर कैसे लंदन पहुंचे, यह बड़ा सवाल है। हमने कंपनी की नीलामी प्रक्रिया पर आपत्ति की है। पूरा नवाब परिवार एकजुट है और ताज हासिल करने का प्रयास कर रहा है।
- नवाब काजिम अली खां उर्फ नावेद मियां (विधायक)
फिलहाल ताज की नीलामी रोकी जानी चाहिए
दोनों ताज लंदन कैसे पहुंचे इसका पता लगाने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। फिलहाल ताज की नीलामी रोकी जानी चाहिए। क्योंकि यह सिर्फ रामपुर नहीं बल्कि पूरे देश की विरासत को सहेजने और सम्मान का सवाल है। भारत सरकार को इस विषय में कठोर कदम उठाने चाहिए।
- काशिफ खां, सह संयोजक, इंटेक (भारतीय सांस्कृतिक निधि)