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कोरोना महामारी के चलते गरीब कल्याण योजना में दो महीने में रिकॉर्ड काम हुआ: केंद्र सरकार

Wed, 02 Sep 2020 03:54 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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ग्राम विकास और कल्याणकारी योजनाओं की चर्चा करते हुए ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला।
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20 जून को देश के प्रधानमंत्री द्वारा  इस योजना को गांवों के ढांचागत विकास और प्रवासियों को रोजगार देने के लिए शुरु किया गया है। इसके तहत अब तक 245668529 कार्य दिवसों का सृजन किया जा चुका है।

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इतना ही नहीं 20107.70 करोड़ रुपयों की लागत से सार्वजननिक शौचालयों से लेकर नेशनल हाइवे तक का काम इन प्रवासी मजदूरों ने इतनी तेजी से निपटाया है। जिससे ग्रामीण भारत के लिए एक मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार करने की दिशा में खासा सहयोग मिलता दिख रहा है। इस योजना में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ावा देने वाले 25 कामों की पहचान की गई थी।

मिशन के रुप में चल रहे अभियान में छह राज्यों बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में लौटे श्रमिकों को 116 जिलों में आजीविका के अवसर देकर उन्हें सशक्त बनाया जा रहा है।  इसे 12 मंत्रालयों और केंद्रीय विभागों तथा  राज्य सरकारों के सामंजस्यपूर्ण प्रयासों के रूप में देखा जा सकता है, जो प्रवासी श्रमिकों और ग्रामीण समुदायों को व्यापक लाभ प्रदान कर रहे हैं।
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इन श्रमिकों द्वारा रिकार्ड समय में किए गए कामों पर नजर डाले तो 5306 सार्वजनिक शौचालय, 804 ग्राम पंचायत भवन, वित्त आयोग के 1569,58 कार्य, नेशनल हाइवे के 7069 काम, 90678 जल संरक्षण और सिंचाई कार्य, गांवों में 5618 सामुदायिक भवन औैर चारदीवारी के लिए दीवारों का निर्माण कार्य, 71682 वृक्षारोपण, 7460 बागवानी,  1668 आगंनवाड़ी भवन, 284039 ग्रामीण आवास, 1402 ग्रामीण सड़कों का निर्माण, रेलवे के 154 कार्य, श्यामाप्रसाद मुखर्जी रुरबन मिशन के 4622 कास, पीएम कुसुम के 895 वर्क, 93390 आप्टिक फाइबर को बिछाने का काम, 7103 जल जीवन मिशन के कार्य, 13956तलाबों की खुदाई और सालिज वेस्ट मैनजमेंट तथा जैविक खाद बनाने 1599 कार्य किए गए हैं।  

इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि गरीब कल्याण रोजगार योजना ने देश के गांवों के विकास में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं को ज़मीन पर बड़े पैमाने पर साकार किया है। इसकी सफलता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इस योजना में अब तक 116 जिलों के हजारों श्रमिकों को रोजगार मिला है। इसमें  बड़ी संख्या में महिला श्रमिक भी हैं जिन्होंने रोजगार के साथ गांवों में महिला स्वावलंबन के लिहाज से विकास के मार्ग को भी प्रशस्त किया  हैं।

बक्सा - (एक सफलता की कहानी)

ऐसी की सफलता की कहानी है। उड़ीसा की शशि बारिक की जो यहां के बलांगीर जिले के  एक गांव तेभादुंगुरी लौटी थी। कोरोना संक्त्रस्मण के दौरान अपना घर बनाने का फैसला किया।  शशि को प्रधानमंत्री आवास योजना -ग्रामीण पीएमएवाई-जी’ के तहत मंजूरी दी गई थी। अधिकारियों ने अप्रत्याशित लॉकडाउन को ध्यान में रखते हुए निर्माण सामग्री और श्रमिकों या कामगारों को इकट्ठा करने के लिए हरसंभव प्रयास किए। इसके परिणामस्वरूप, शशि ने पहली किस्त प्राप्त करने के एक माह के भीतर ही हर दृष्टि से अपने घर का निर्माण पूरा कर लिया। 80 वर्षीया विधवा शशि बारिक अब अपने परिवार के साथ पक्के मकान में रह रही है।

इससे पहले शशि गांव में एक जीर्ण-शीर्ण घर में रह रही थी। उसका बेटा दिहाड़ी मजदूर है। अपनी छोटी कमाई की बदौलत भी वह अपने 5 सदस्यीय परिवार के लिए प्रतिदिन दो वक्त के भोजन का इंतजाम करने में सक्षम हैं। एक पक्का घर हमेशा उनके लिए महज सपना ही था। हालांकि, सरकार ने पक्का घर बनाने के लिए ग्रामीण आवास योजना के तहत 130,000 रुपये की वित्तीय सहायता देकर उन्हे आवश्यक सहयोग दिया है। घर का निर्माण जल्दी पूरा करने के लिए शशि को सरकार की ओर से  20,000 रुपये का ईनाम देने की घोषणा की गई है।

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