'प्लेजियारिज्म' के आरोपों से घिरीं पांडीचेरी विश्वविद्यालय की वीसी चंद्रा कृष्णमूर्ति ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया। उन पर अकादमिक धोखाधड़ी के गंभीर आरोप थे, हालांकि उन्होंने महीने भर पहले सरकार की ओर से लगाए गए सभी आरोपों का खंडन किया था। उल्लेखनीय है कि इंडियन एक्सप्रेस ने 2014 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया था कि कृष्णमूर्ति ने अपनी सीवी में दी गई एक किताब के अधिकांश हिस्सों को चोरी किया है। सीवी में दो ऐसी किताबों का भी जिक्र है, जो कभी छपी ही नहीं।
उन्हें राष्ट्रपति की ओर से 21 अगस्त, 2015 को कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया था। यूजीसी ने कृष्णमूर्ति पर लगे सभी आरोपों की जांच की और उन्हें कई अकादमिक धोखाधड़ियों का दोषी पाया। यूजीसी की जांच में कहा गया कि कृष्णमूर्ति ने डी लिट की फर्जी डिग्री भी ले रखी है। राष्ट्रपति की नोटिस का जवाब उन्होंने हाल ही में भेजा था।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कृष्णमूर्ति ने राष्ट्रपति को अपनी इस्तीफा भेजा था, जिसे सोमवार को मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजा दिया गया। इस्तीफा स्वीकार होगा या नहीं इस पर अंतिम फैसला सरकार को ही करना है। कृष्णमूर्ति को फिलहाल छुट्टी पर हैं। उन्हें फरवरी, 2013 में पांडीचेरी विश्वविद्यालय का वीसी नियुक्त किया गया था। वह विश्वविद्यालय की पहली महिला वीसी थीं।