महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में अब एक महीने से भी कम का समय शेष रह गया है। जिसके लिए सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी दावेदारी साबित करने में कहीं से भी पीछे नहीं दिख रहीं हैं। इसी बीच चुनाव आयोग के सूत्रों ने सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन रचने के आरोपों का खंडन किया है। कार्यालय ने राउत के आरोपों को निराधार और संवैधानिक योजना की समझ से रहित करार दिया है। बता दें कि वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद राज्य में 20 नवंबर को मतदान होना है वहीं मतों की गिनती 23 नवंबर को होगी।
राउत के दावों का खंडन
महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के सूत्रों ने शिवसेना यूबीटी नेता के बयान पर कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका संविधान के अनुच्छेद 172(1) के साथ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 15 के अनुसार, विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने के छह महीने के भीतर चुनाव कराना और नव-निर्वाचित विधायकों की सूची राज्यपाल को सौंपना है।
कार्यालय के द्वारा जारी बयान में बताया गया कि आयोग 26 नवंबर से पहले और 23 नवंबर को मतगणना समाप्त होने के तुरंत बाद यह प्रक्रिया पूरी कर लेगा। उन्होंने कहा कि नवनिर्वाचित विधायकों की सूची प्रस्तुत किए जाने के बाद, राज्यपाल अनुच्छेद 164 के अनुसार अपने अनिवार्य संवैधानिक कर्तव्यों के तहत सरकार के गठन के लिए आमंत्रित कर सकते हैं, जो विधानसभा की अवधि समाप्त होने की अवधि से बंधा नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात को मुख्य रूप से दर्शाया कि 26 नवंबर, 2024 की प्रासंगिकता केवल चुनाव आयोग द्वारा चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए है।
सांसद संजय राउत का आरोप
रविवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिवसेना नेता और सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि अमित शाह के साथ भाजपा ने यह स्वीकार कर लिया है कि पार्टी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि महा विकास अघाड़ी के लिए सरकार गठन के बारे में चर्चा और निर्णय लेने के लिए उपलब्ध समय को सीमित करने की रणनीति है। यदि एमवीए घटक दावा करने में विफल रहते हैं, तो राज्यपाल छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करेंगे।
मतदान कार्यक्रम पर सवाल
इसके साथ ही संजय राउत ने दावा किया था कि भाजपा एमवीए को सत्ता में लौटने से रोकने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। उन्होंने कहा इसके अतिरिक्त, चुनाव आयोग ने चुनावों को इस तरह से निर्धारित किया है कि यह एमवीए के सरकार बनाने के अवसर को प्रभावी रूप से सीमित करता है।