प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को कहा कि उसने वाईएसआरसीपी के पूर्व सांसद एम.वी.वी. सत्यनारायण और कुछ अन्य के खिलाफ छापेमारी के बाद 300 से अधिक बिक्री दस्तावेज और 'बेनामी' भूमि पासबुक जब्त की हैं। यह कार्रवाई आंध्र प्रदेश सरकार की जमीन हड़पने के मामले में की गई है।
एजेंसी ने 19 अक्तूबर को पूर्व विधायक और लेखा परीक्षक गणननेंनी के खिलाफ विशाखापत्तनम में पांच स्थानों पर छापेमारी की। सत्य नारायण 2019 से 2024 तक वाईएसआरसीपी के सांसद रहे हैं। उन्होंने इस साल विशाखापत्तनम पूर्व सीट से आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया था। लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
यह मामला 12.51 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसका बाजार मूल्य 200 करोड़ रुपये से अधिक है। यह जमीन राज्य सरकार ने एक कंपनी के प्रमोटरों को वृद्धों और अनाथों के लिए आवासीय परियोजना के तहत निर्माण के लिए आवंटित की गई थी।
ईडी ने एक बयान में कहा, विशाखापत्तनम के अरिलोवा पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी में सत्य नारायण, राव और एक तीसरे व्यक्ति गड्डे ब्रह्माजी के खिलाफ हस्ताक्षरों की नकल, बिक्री दस्तावेजों को तैयार करना और जबरन जमीन हड़पने का आरोप लगाया गया है।
यह जमीन विशाखापत्तनम के येंडना गांव में स्थित है, जिसे 2008 में वृद्धों और अनाथों के लिए भवन निर्माण के लिएए हायग्रीवा फार्म्स एंड डेवलपर्स नामक कंपनी को आवंटित किया गया था। ईडी के मुताबिक, यह जमीन 2010 में 5.63 करोड़ रुपये के भुगतान पर कंपनी के नाम पर पंजीकृत की गई थी। हालांकि, ईडी ने कहा कि आध्र प्रदेश पंजीकरण और स्टांप विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक इस संपत्ति का बाजार मूल्य संपत्ति के हस्तांतरण दस्तावेज की तारीख पर करीब 30.25 करोड़ रुपये था।
एजेंसी ने कहा, आरोपियों ने धोखाधड़ी से इस भूमि का स्वामित्व हासिल किया और इसे छोटे प्लॉट में बांटकर अलग-अलग लोगों 2021 से बिक्री दस्तावेजों के जरिए बेचा, जिससे 150 करोड़ रुपये से अधिक की आपराधिक आय पैदा हुई।
आरोपियों के घरों और कार्यालयों की तलाशी में ईडी ने कई चीजें जब्त कीं। इनमें डिजिटल उपकरण, बेनामी भूमि पासबुकें और 300 से अधिक अचल संपत्तियों के बिक्री दस्तावेज शामिल हैं। ये दस्तावेज सत्य नारायण और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर हैं। इसके अलावा, अचल संपत्तियों की खरीद में पचास करोड़ रुपये से अधिक की नकद लेनदेन भी जब्त की गई।