ताली बजाने की बात हो या दीये जलाने का आह्वान। यह प्रधानमंत्री का तरीका है देश के हर व्यक्ति से सीधा संबंध कायम करने का। पिछले 6 सालों के दौरान जिस तरह उन्होंने भाजपा के कार्यकर्ताओं को साल के 365 में से ढाई सौ से तीन सौ दिनों तक किसी न किसी कार्यक्रम में लगाए रखा है, उसी तरह वे लॉकडाउन के दौरान भी जनता में पॉजिटिव सोच विकसित करना चाहते हैं। उनका मानना है कि हौसला ऊंचा रखकर ही व्यक्ति खराब से खराब परिस्थिति से निपट सकता है।
कांग्रेस बोली...ये बस प्रतीकात्मक सोच, बीमारी से बचाव का कोई लेनादेना नहीं
कांग्रेस ने इसे प्रतीकात्मक सोच बताते हुए कहा कि इससे बीमारी से बचाव का कोई लेनादेना नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि पीएम गैरजरूरी काम बताना बंद करें और लॉकडाउन से प्रवासी मजदूरों और गरीबों के सामने खड़े संकट से निकलने का रास्ता बताएं। एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा, लोगों को उम्मीद थी कि पीएम बचाव की बात करेंगे लेकिन उन्होंने धोखा किया और दीया जलाने की अपील की।