बैठक की अध्यक्षता गृह मंत्री अमित शाह करेंगे, जिसमें अंतरराष्ट्रीय तस्करी को यूएपीए के दायरे में लाने और जांच एनआईए से कराने पर चर्चा होगी। जदयू सूत्रों ने बताया कि नीतीश की योजना इस बैठक के इतर ममता बनर्जी और नवीन पटनायक का मन टटोलने की है।
विपक्षी एकता के लिए वाम दलों, कांग्रेस और समाजवादी विचारधारा वाले दलों के साथ बैठक कर चुके बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब पश्चिम बंगाल और ओडिशा के मुख्यमंत्री का मन टटोलेंगे। पांच नवंबर को पश्चिम बंगाल में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद (ईजेडसी) की बैठक के इतर इन नेताओं की मुलाकात की संभावना है।
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गौरतलब है कि बैठक की अध्यक्षता गृह मंत्री अमित शाह करेंगे, जिसमें अंतरराष्ट्रीय तस्करी को यूएपीए के दायरे में लाने और जांच एनआईए से कराने पर चर्चा होगी। जदयू सूत्रों ने बताया कि नीतीश की योजना इस बैठक के इतर ममता बनर्जी और नवीन पटनायक का मन टटोलने की है। इनमें ममता बनर्जी जहां गैरकांग्रेसी विपक्ष को एकजुट करने की पक्षधर हैं तो पटनायक राजग-कांग्रेस से समान दूरी की पुरानी नीति पर ही आगे बढ़ रहे हैं। खास बात यह है कि जदयू के राजग से नाता तोड़ने के बाद यह पहला अवसर होगा जब नीतीश, नवीन और ममता-आमने सामने होंगे।
ममता, केसीआर, केजरीवाल हैं अड़चन
कांग्रेस के साथ विपक्ष को एकजुट करने की राह में बंगाल की सीएम ममता, तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव और और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल बड़ी अड़चन हैं। केसीआर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहुंच बनाने के लिए अलग से मुहिम चला रहे हैं। ऐसा ही केजरीवाल भी कर रहे हैं। ये दोनों नेता भी ममता की तरह कांग्रेस के बिना गैर-भाजपा विपक्ष को एकजुट करना चाहते हैं। ऐसे में नीतीश की ममता और पटनायक से मुलाकात को अहम माना जा रहा है।
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ईजेडसी की बैठक भी अहम
शाह की अध्यक्षता में होने जा रही ईजेडसी की बैठक भी अहम है। दरअसल तस्करी, खासतौर से मादक तस्करी के बढ़ते मामलों ने केंद्र की चिंता बढ़ा दी है। केंद्र चाहता है कि देश की सुरक्षा के मद्देनजर तस्करी के ऐसे मामले जिनका संबंध अंतरराष्ट्रीय गिरोह से है, उसे यूएपीए के दायरे में लाया जाना चाहिए। इसके अलावा इसकी जांच करने का अधिकार एनआईए को मिलना चाहिए। बैठक में शाह केंद्र की इस सलाह पर राज्यों की राय जानेंगे।