हालांकि विपक्षी दलों के गठबंधन समूह की इस बैठक से पहले कई तरह के अब सवालों को भी बड़े नेताओं के सामने रखे जाने की योजना बनाई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक महत्वपूर्ण चर्चा चुनाव के दौरान पैदा हुई कुछ आपसी सियासी मनमुटाव को लेकर भी होनी हैं। हालांकि खुले तौर पर गठबंधन का कोई भी नेता इसे स्वीकार नहीं कर रहा है। सूत्रों की मानें तो गठबंधन दलों के कुछ सियासी पार्टियों का इन विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी के साथ अंदरूनी तौर पर मनमुटाव हुआ। दोनों दलों के नेताओं की और से खूब तीखे तीर चले और गठबंधन की उपयोगिता पर भी सवाल उठाए गए। हालांकि अब सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की भी हो रही है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच में हुई तल्खी विधानसभा चुनावों के बाद पूरी तरह से खत्म होने वाली है। इसके लिए बाकायदा अंदरूनी तौर पर दोनों पार्टियों के प्रमुख नेताओं के बीच में न सिर्फ बातचीत हुई है, बल्कि आगे के लिए सब कुछ बेहतर सामंजस्य से बढ़ता रहे उसे पर भी बात हुई है।
गठबंधन समूह से जुड़े नेताओं का कहना है कि विधानसभा चुनावों के परिणाम के बाद अब लोकसभा चुनावों के लिए तैयारियां पूरी तरीके से शुरू की जाएगी। इसलिए आगे की रणनीति बनाने की तैयारियों को बढ़ाने की योजनाएं बनाई जा रही हैं। गठबंधन समूह से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि जिस तरीके की चर्चा सियासी गलियारों में गठबंधन को लेकर उठ रही है, दरअसल वह एक सोची समझी साजिश के तहत ही किया जा रहा है। वह कहते हैं कि किसी भी राजनीतिक दल के बीच में कोई भी अनबन नहीं है। उनका कहना है कि जो कमेटियां गठबंधन समूह की बनाई गई थीं, वह भी दिसंबर से पूरी सक्रियता के साथ आगे बढ़ेंगी।