शरद पवार के नए बयान से सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सवाल उठने लगा कि आखिर शरद पवार किस रोटी को पलटने की बात कर रहे हैं? क्या फिर से महाराष्ट्र में कोई बड़ा उलटफेर होने वाला है या फिर पवार पार्टी को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने जा रहे हैं? आइए जानते हैं...
महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर से हलचल तेज है। कारण एनसीपी प्रमुख शरद पवार का ताजा बयान है। पवार ने गुरुवार को मुंबई में आयोजित युवा मंथन कार्यक्रम में रोटी पलटने की बात कह डाली। पवार बोले, 'किसी ने मुझे कहा कि रोटी सही समय पर पलटनी होती है और अगर सही समय पर नहीं पलटी तो वो कड़वी हो जाती है। अब सही समय आ गया है रोटी पलटने का, उसमें देरी नहीं होनी चाहिए। इस बारे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को आग्रह करूंगा की वो इस पर काम करें।'
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पवार का ये बयान ऐसे समय आया है जब उनके भतीजे और एनसीपी नेता अजित पवार के नए राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रहीं हैं। दावा किया जा रहा है कि वह भाजपा के साथ हाथ मिला सकते हैं। हालांकि, अजित पवार इन अटकलों को खारिज भी कर चुके हैं।
अब शरद पवार के नए बयान से सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी। सवाल उठने लगा कि आखिर शरद पवार किस रोटी को पलटने की बात कर रहे हैं? क्या फिर से महाराष्ट्र में कोई बड़ा उलटफेर होने वाला है या फिर पार्टी को लेकर पवार कोई बड़ा फैसला लेने जा रहे हैं? आइए जानते हैं...
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कौन सी रोटी पलटने की बात कर रहे हैं शरद पवार?
इसे समझने के लिए हमने महाराष्ट्र के राजनीतिक विश्लेषक आनंद त्रिपाठी से बात की। उन्होंने कहा, 'राजनीति में बयानों का बड़ा मतलब होता है। शरद पवार अपनी पार्टी ही नहीं, बल्कि देश के बड़े नेताओं में से एक हैं। इन दिनों महाराष्ट्र की सियासत को लेकर बड़े-बड़े दावे हो रहे हैं। ऐसा नहीं है कि ये दावे यूं ही होंगे। कहीं न कहीं इनमें चिंगारी जरूर होगी। पवार के बयान को भी गंभीरता से लेने की जरूरत है।' आगे आनंद ने पवार के बयान के तीन मतलब बताए। कहा कि इन तीनों में से कुछ एक जरूर हो सकता है।
1. तो भतीजे या बेटी को पार्टी की कमान सौंप सकते हैं पवार: शरद पवार ने युवा मंथन कार्यक्रम में अपनी बात रखी है। ऐसे में हो सकता है कि अब पवार पार्टी की जिम्मेदारी किसी युवा हाथों में देना चाहते हों। इसमें दो बड़े नाम हैं। पहला उनकी बेटी सुप्रिया सुले और दूसरा उनके भतीजे अजित पवार हैं। अजित पवार को लेकर हाल के दिनों में कई अटकलें लग चुकी हैं। संभव है कि पवार इन्हीं दोनों में से किसी एक को पार्टी की कमान सौंप दें। इसके जरिए वह युवाओं के बीच संदेश देना चाहते हों कि एनसीपी में युवाओं के लिए अवसर है और एनसीपी युवाओं को आगे बढ़ाती है।
2. पार्टी में बड़े बदलाव कर सकते हैं : नेतृत्व से हटकर पार्टी के संगठानात्मक ढांचे में भी पवार बदलाव कर सकते हैं। संभव है कि वह पार्टी में नए सिरे से पदाधिकारियों का एलान करें। युवाओं और महिलाओं को मौका देकर वह अगले साल होने वाले लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव पर फोकस करें।
3. महाराष्ट्र विकास अघाड़ी गठबंधन छोड़कर भाजपा के साथ जाएंगे? : इस वक्त भाजपा को भी शिंदे के साथ-साथ किसी दूसरे साथी की जरूरत है, जिसके साथ मिलकर लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव में मजबूती से आगे बढ़ सके। वहीं, एनसीपी को पता है कि अगर वह महाराष्ट्र विकास अघाड़ी का हिस्सा बने रहते हैं तो चुनावों में उनकी पार्टी को ज्यादा सीटें नहीं मिलेंगी। ऐसे में संभव है कि वह खुद नए विकल्प की तलाश कर रहे हों। गठबंधन छोड़कर वह या तो अकेले दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हों या फिर भाजपा के साथ जा सकते हैं।
पवार ने पिछले दिनों भी गठबंधन से हटकर अदाणी के मुद्दे पर अपनी अलग राय दी थी। उन्होंने कहा था कि अदाणी ग्रुप के मामले में जेपीसी जांच की जरूरत नहीं है। इस पर कांग्रेस ने कहा था कि यह उनकी निजी राय है। हमारे साथ इस मुद्दे पर 19 दल साथ है। इस समय शरद पवार की पार्टी एनसीपी का कांग्रेस और शिवसेना के साथ महाराष्ट्र में गठबंधन है।