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Bangladesh Elections: शेख हसीना की सीट पर हिंदू उम्मीदवार का पर्चा हुआ खारिज, बीएनपी पर धमकाने का आरोप

Sun, 04 Jan 2026 08:30 PM IST
अमन तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका

सार

Bangladesh Elections: अशांत बांग्लादेश में एक तरफ जहां हिंदू समुदाय को निशाना बनाकर एक के बाद एक हमले किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सीट से नामांकन करने वाले हिंदू उम्मीदवार का पर्चा खारिज कर दिया गया है।  
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बांग्लादेश का झंडा - फोटो : ANI
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विस्तार
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बांग्लादेश में आगामी आम चुनावों की सरगर्मियों के बीच एक बड़ा विवाद सामने आया है। गोपालगंज-3 संसदीय सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे प्रमुख हिंदू नेता और वकील गोबिंददेब प्रमाणिक का नामांकन रद्द कर दिया गया। यह वही सीट है, जहां से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना सांसद थीं और यहां हिंदू मतदाताओं की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक है।
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हिंदू नेता ने लगाया आरोप
प्रमाणिक 'बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोते' के महासचिव भी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनका नामांकन एक राजनीतिक साजिश के तहत खारिज किया गया। बांग्लादेशी चुनाव नियमों के मुताबिक, किसी भी निर्दलीय प्रत्याशी को अपने क्षेत्र के कम से कम एक प्रतिशत मतदाताओं के समर्थन हस्ताक्षर जमा करने होते हैं। प्रमाणिक ने एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए को बताया कि उन्होंने असली हस्ताक्षर जमा किए थे, लेकिन 'बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी' (बीएनपी) के कार्यकर्ताओं ने उनके समर्थकों को डराया-धमकाया। 

समर्थकों को किया गया मजबूर
प्रमाणिक आगे आरोप लगाते हुए दावा किया की बीएनपी के दबाव के कारण समर्थकों को रिटर्निंग अधिकारी के सामने यह झूठ बोलने पर मजबूर किया गया कि उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए हैं या गलत तरीके से किए हैं। इसी आधार पर अधिकारी ने हस्ताक्षरों को अमान्य बताते हुए उनका नामांकन पत्र खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि गोपालगंज के लगभग 3 लाख मतदाताओं में से लगभग 51 प्रतिशत हिंदू हैं। इसलिए बीएनपी को इस क्षेत्र में जनसमर्थन नहीं है, इसलिए वे ऐसे हथकंडे अपना रहे हैं।  
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एक अन्य हिंदू नेता का नामांकन रोका गया 
गोबिंददेब प्रमाणिक ने स्पष्ट किया कि वह हार नहीं मानेंगे। उन्होंने चुनाव आयोग में अपील करने की योजना बनाई है और जरूरत पड़ने पर उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे। इसी बीच, एक अन्य हिंदू उम्मीदवार दुलल बिस्वास के नामांकन पत्र भी खारिज कर दिए गए। बिस्वास को पंजीकृत राजनीतिक दल गोनो फोरम ने उम्मीदवार बनाया था, इसलिए उन पर 1 प्रतिशत मतदाता शपथ पत्र का नियम लागू नहीं होता था। बताया जाता है कि दस्तावेजों की कमी के कारण उनका नामांकन रोक दिया गया था और उन्हें दोबारा जमा करने का समय दिया गया था। 
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बांग्लादेश में हमले और हिंसा ने बढ़ाई चिंताएं
हालांकि, पड़ोसी सीट गोपालगंज-2 से एक अन्य निर्दलीय हिंदू प्रत्याशी उत्पल बिस्वास अभी भी चुनावी दौड़ में बने हुए हैं। इस सीट का प्रतिनिधित्व पहले पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के चचेरे भाई शेख सलीम करते थे। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार चुनाव की ओर बढ़ रही है। हालांकि अधिकारियों ने स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव का वादा किया है, लेकिन मीडिया संस्थानों पर हालिया हमलों और हिंसा ने चिंता बढ़ा दी है।

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