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Odisha Politics: वीके पांडियन के बचाव में पूर्व CM नवीन पटनायक, वक्फ कानून के बाद कैसे थमेगी बीजद में बगावत?

सार

ओडिशा में पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) में वक्फ कानून पर नाटकीय रुख को लेकर पिछले पांच दिनों से जारी सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि, इस बीच नवीन ने अपने बयान से साबित कर दिया है कि वह अब भी अपने सलाहकार वीके पांडियन के साथ हैं। 
 
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नवीन पटनायक और वीके पांडियन - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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ओडिशा में पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) में वक्फ कानून पर नाटकीय रुख को लेकर पिछले पांच दिनों से जारी सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि, इस बीच नवीन ने अपने बयान से साबित कर दिया है कि वह अब भी अपने सलाहकार वीके पांडियन के साथ हैं। पांडियन को लेकर पार्टी में बढ़ते असंतोष को देखते हुए नवीन पटनायक ने कहा है कि मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि कार्तिकेयन पांडियन ने अतीत में राज्य और पार्टी दोनों के लिए अच्छा काम किया है। हालांकि राज्य के सियासी जानकारों का मानना है कि बीजद प्रमुख नवीन पटनायक ने बुधवार शाम को भले ही सफाई दी, परंतु उससे पार्टी में बढ़ती राजनीतिक अराजकता कम होने के बजाय पार्टी में फूट पड़ने की संभावना ज्यादा बढ़ती दिख रही है।

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पूर्व सीएम पटनायक का कहना है कि पांडियन की किसी भी चीज के लिए आलोचना या उन पर दोष नहीं लगाया जाना चाहिए। वह पहले ही पिछले 10 महीनों से पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं। ऐसे में बीजद के किसी भी निर्णय के लिए उनकी आलोचना करना या उन्हें बदनाम करना उचित नहीं है। बीजद में पिछले छह दिनों से चल रही बयानबाजी के बाद नवीन पटनायक ने उक्त बातें कही हैं। इसी तरह प्रभात त्रिपाठी का नाम लेते हुए नवीन पटनायक ने कहा कि चिटफंड मामले में कुछ साल पहले ही पार्टी से उन्हें निष्कासित कर दिया गया है।

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पटनायक के नेतृत्व पर खड़े किए सवाल
बीजू जनता दल में यह विवाद राज्यसभा में वक्फ बिल पर वोटिंग के मसले को लेकर शुरु हुआ है। करीब 23 साल बाद फिर पार्टी के नेताओं ने नवीन पटनायक के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी में एक गुट के नाराज नेताओं का मानना है कि पर्दे के पीछे नवीन पटनायक के सलाहकार वीके पांडियन ने व्हिप जारी नहीं करने का फैसला कराया। उनका मानना है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद पांडियन ने राजनीति से संन्यास ले लिया, मगर आज भी पार्टी के फैसले ले रहे हैं।

सात सांसदों में से तीन ने विधेयक के पक्ष में डाला था वोट
दरअसल, राज्यसभा में तीन अप्रैल को वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के बाद मतदान हुआ। नवीन पटनायक और बीजू जनता दल के नेताओं ने बार-बार वक्फ विधेयक का विरोध किया था, मगर वोटिंग से पहले पार्टी ने यू-टर्न लिया। पार्टी नेता सस्मित पात्रा ने मीडिया को बताया था कि पार्टी कोई व्हिप जारी नहीं करेगी, विपक्ष हैरान रह गया। लोकसभा में बीजेडी का कोई सांसद नहीं है, राज्यसभा के सात सांसदों में तीन ने विधेयक के पक्ष में और तीन ने विरोध में वोट डाले। एक सांसद देबाशीष सामंतराय ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। राज्यसभा में बिल पास होते ही वक्फ कानून का विरोध करने वाले सांसदों ने नवीन पटनायक के निजी सचिव रहे वीके पांडियन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वीके पांडियन के इशारे पर सस्मित पात्रा ने सोशल मीडिया में पोस्ट पर व्हिप जारी नहीं करने का ऐलान किया है।
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फैसले से नाराज सांसद खान पहुंचे पटनायक के निवास
इस फैसले से नाराज सांसद मुजीब उल्ला खान भुवनेश्वर पहुंचते ही मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल के साथ पटनायक के आवास नवीन निवास जा पहुंचे। वहां पटनायक ने स्थिति संभालने की कोशिश की और दावा किया कि धर्मनिरपेक्षता के कारण ही उन्होंने 2008 के कंधमाल दंगों के बाद उसने बीजेपी से नाता तोड़ लिया था। हालांकि अल्पसंख्यक प्रतिनिधिमंडल ने पांडियन गो बैक और पांडियन हटाओ, बीजेडी बचाओ जैसे नारे लगाकर अपना गुस्सा जाहिर कर दिया। हालांकि इस विवाद के बीच कई सांसद पांडियन के समर्थन में भी आए। राज्यसभा सदस्य मानस मंगराज, सुलता देव, निरंजन बिसी और सुभाषिश खुंटिया ने कहा कि पांडियन अब राजनीति से दूर हो गए हैं। सामंतराय उन्हें बेवजह विवाद में घसीट रहे हैं।

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