राष्ट्रीय पार्टियां भाजपा, कांग्रेस, बीएसपी, एनसीपी, माकपा, सीपीआई आरटीआई के दायरे में आती हैं। लेकिन ये छह दल तीन साल से केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस आदेश की अवहेलना कर रहे हैं जिसमें उसने कहा था कि ये दल आरटीआई के दायरे में आते हैं। इस आदेश के खिलाफ कोर्ट से इन दलों
ने कोई स्टे ऑर्डर भी नहीं लिया है। सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर हुई थी, ताकि सूचना न देने पर इन पर कार्रवाई की जा सके।
दरअसल, आरटीआई एक्टिविस्ट सुभाष चंद्र अग्रवाल और एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) ने 2012 में सीआईसी में इन छह दलों की आरटीआई का जवाब न देने की शिकायत की थी। क्योंकि इन दलों ने अपने आप को पब्लिक अथॉरिटी मानने से इनकार कर दिया। इस संबंध में सीआईसी ने 3 जून, 2013 को आदेश दिया था कि आरटीआई एक्ट की धारा 2 (एच) के तहत ये छह राजनीतिक दल आरटीआई के दायरे में आएंगे।
सीआईसी के इस आदेश की काट निकालने के लिए तत्कालीन यूपीए सरकार ने संसदीय कमेटी बनाकर विधेयक लाने का इरादा किया था। हालांकि यह विधेयक धरातल पर नहीं उतर सका। इसके बाद भी दलों ने आरटीआई का जवाब देना शुरू नहीं किया। इस मामले में सुभाष ने सीआईसी में नॉन कंम्पलाइंस (आज्ञा का पालन न करना) फाइल की।
इस मामले की सुनवाई के दौरान एडीआर और आरके जैन (इंटरवीनर) को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। आरके जैन ने भी इन दलों से आरटीआई के जरिए कुछ सूचना मांगी थी। इसके बाद भी दलों ने सूचना नहीं दी। 2015 में इन दलों पर कार्रवाई के लिए एडीआर और सुभाष चंद्र अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल फाइल की।