हो सकता है कोरोना के कारण शरीर में आई सुस्ती ही कारण हो? यह भी हो सकता है कि निजी सचिव जयशंकर सिंह और प्रताप के कोरोना संक्रमित होने का भी असर हो। वैसे तो टीम मुख्यमंत्री योगी के कई अधिकारी कोरोना संक्रमित हैं। सूचना विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने वाले नवनीत सहगल भी अभी संक्रमण से बाहर नहीं आए हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय भी संक्रमण से खासा तंग है। सीएम के ओएसडी तक परेशान हैं, लेकिन एक चर्चा आम है कि मुख्यमंत्री जल्दी-जल्दी गुस्से में आ रहे हैं। बताते हैं पहले ऐसा नहीं था। वे हमेशा प्रशासनिक मामलों में सतर्क और सख्त रहते थे, लेकिन इस तरह से गुस्सा नहीं करते थे। हालांकि इस बारे में लखनऊ के एक बड़े अधिकारी ने सही फरमाया। जनाब का कहना है कि 2022 आने में अब सात महीने ही रह गए हैं। ऊपर से कोरोना ने जीना हराम कर रखा है। अब इस पर गुस्सा भी नहीं आएगा क्या?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टीम के मीडिया मैनेजमेंट का कोई जवाब नहीं है। टीम के गुरु प्रधानमंत्री के पुराने विश्वास पात्र हैं। उनके नाम से बड़े-बड़े केन्द्रीय मंत्री और सचिव स्तर के अधिकारी घबराते हैं। उन्हें पता है कि कब प्रधानमंत्री की यशस्वी छवि को सरकार के सहारे की जरूरत है और कब किस चेहरे को जनता के बीच में छवि को ठीकठाक रखने के लिए आगे लाना है। बताते हैं कोरोना का विस्फोट होने के बाद से लगातार एम्स के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया, नीति आयोग के सदस्य डा. वीके पॉल, मेदांता के डा. त्रेहन मोर्चा संभाले हुए हैं। कहा जा रहा है कि यह ऐसे ही नहीं है। इसके पीछे बड़ा कारण यह भी तीनों चेहरे चिकित्सा क्षेत्र का नाम हैं। इनके सामने आने से जहां जनता को जानकारी मिलेगी, वहीं लोगों का गुस्सा थामने में मदद मिलेगी। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि राजनीतिक बातें नहीं होंगी। बताते हैं यही कारण है कि इन तीन चेहरों के बाद और कोई चेहरा सामने नहीं आ रहा है। इन सबके समानांतर पूरा मोर्चा प्रधानमंत्री ने भी संभाल रखा है।