अब आठ देशों की एजेंसियां, जिनमें भारत की 'रॉ' भी शामिल है, वुहान की लैब से वह फाइल हासिल करने में जुट गई हैं, जिसमें RaTG13 वायरस का राज छिपा है। इसी फाइल में 'कोरोना' वायरस की कुंडली है। इन एजेंसियों में अमेरिका की सीआईए, ब्रिटेन की एमआई6, आस्ट्रेलियन सीक्रेट इंटेलिजेंस सर्विस 'एएसआईएस', फ्रांस की डायरेक्ट्रेट जनरल फॉर एक्स्टर्नल सिक्योरिटी, न्यूजीलैंड की 'सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस', कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस और रूस की 'फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस' शामिल हैं।
कैबिनेट सेक्रेटेरिएट के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, दुनिया के अनेक देश कोरोना संक्रमण की सच्चाई जानना चाहते हैं। उनका प्रयास है कि वे अपने-अपने तरीके से इस वायरस की तह तक पहुंचकर जांच करें। पिछले साल अमेरिका, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा की सीक्रेट एजेंसियों ने वुहान की लैब तक पहुंचने का प्रयास किया था। हालांकि उसी दौरान डब्ल्यूएचओ की टीम भी वुहान का दौरा कर रही थी।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक खास टीम ने वुहान को लेकर एक फैक्ट-शीट तैयार की थी। इसमें कहा गया कि चीन की वुहान लैब में इस तरह के वायरस को रखे जाने की सुविधाएं मौजूद हैं। वुहान लैब में लंबे समय से ऐसे वायरस रहे हैं। वहां की गलतियों से ही कोरोना वायरस दुनिया में फैल गया है। हालांकि बाद में कुछ ऐसे सवाल भी उठे कि वुहान लैब के वैज्ञानिक या दूसरे कर्मी संक्रमित क्यों नहीं हुए हैं। अब दोबारा से आठ देशों की सीक्रेट एजेंसियां वुहान की लैब से वह फाइल हासिल करना चाहती हैं, जिसमें 2004 से लेकर अब तक चमगादड़ों पर की गई कई रिसर्च रिपोर्ट शामिल हैं।
इंटेलिजेंस एजेंसियों का खास टारगेट यह रहेगा कि वुहान लैब से कोरोनो वायरस को गलती से जारी किया गया है या इसके पीछे एक सोचा समझा होमवर्क रहा है। डब्ल्यूएचओ के जांचकर्ताओं की टीम ने इसे 'बेहद असंभावित' बताया था। बाद में यह बात भी सामने आई कि जब तक जांचकर्ताओं को कच्चा डाटा मुहैया नहीं कराया जाता, तब तक कोरोना की सच्चाई को सामने लाना मुश्किल होगा। यह समझाना अभी आसान नहीं है कि सैकड़ों मील दूर चमगादड़ों की गुफाओं से निकलने वाला कोरोनो वायरस वुहान के लिए अपना रास्ता बना सकता है।
वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के पास एक ऐसा कार्यक्रम था जहां प्रयोगशाला में विश्लेषण करने की खातिर नमूने एकत्र करने के लिए वैज्ञानिकों ने गुफाओं की यात्रा की थी। वुहान लैब में आरएटीजी13 वायरस पहले से रखा हुआ था। यह वायरस चीन के चमगादड़ों से ही मिला था और ये कोरोना वायरस से 96.2 फीसदी मिलता है। इस वायरस का सैंपल 2013 के दौरान एक खदान से मिला था। अब आठ देशों की एजेंसियां यह पता लगाएंगी कि क्या आरएटीजी13 का रिसाव सिद्धांत ही कोरोना संक्रमण के जिम्मेदार है।
द वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में विभिन्न जंतुओं पर की जाने वाली रिसर्च, कोरोना वायरसों का भंडारण, उनकी मदद से तैयार होने वाले नए-नए वैरियंट, कोरोना वायरस के चमगादड़ से इंसानों में पहुंचने का तरीका, वुहान लैब की सुरक्षा प्रणाली बायोसेफ्टी रेटिंग लेवल-4 का पता लगाना और क्या चीन द्वारा कोई जैविक हथियार बनाने के लिए इस तरह के दूसरे वायरस पर काम किया जा रहा है, आदि जानकारियां हासिल करने के लिए इंटेलिजेंस एजेंसी प्रयास करेंगी।
वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की उस जगह से दूरी केवल 16 किमी बताई गई है, जहां पर दुनिया का सबसे पहला कोरोना केस देखने को मिला था। क्या इसी इलाके में कोरोना वायरस रिसर्च के जरिए नए स्ट्रेन तैयार किए गए थे। डब्ल्यूएचओ की टीम, जो जनवरी में चीन पहुंची थी। वह टीम चार सप्ताह तक वहां रही थी। कोविड-19 मामलों में चीन ने कच्चा डाटा टीम को सौंपने से इंकार कर दिया था। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने लिखा था, डब्ल्यूएचओ की अगुवाई वाली जांच में बीजिंग और वाशिंगटन के बीच कई तरह की दूरी बनी रही। चीन पर प्रारंभिक प्रकोप की सीमा को छिपाने का आरोप लगाया गया है। यात्रा की शर्तों के चलते टीम को चीनी विशेषज्ञों से ज्यादा मदद नहीं मिली।