जयपुर में अब यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की संगठन पर पकड़ कमजोर पड़ रही है। मंगलवार को वसुंधरा निजी आवश्यक काम बताकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया की ताजपोशी में भी नहीं आई। जबकि यह वही वसुंधरा हैं, जिन्होंने अपना वीटो लगवाकर गजेन्द्र सिंह शेखावत को राज्य का पार्टी अध्यक्ष बनने से रोक दिया था। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की तरफ देखती भी नहीं थी और पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को भी भाव नहीं देती थी। उसी वसुंधरा को राजस्थान में संगठन पर पकड़ बनाए रखने के लिए इस बार अपनी पसंद का अध्यक्ष बनवाने के लिए खूब पापड़ बेलना पड़ा। अंततः इसमें वे असफल रहीं।
देश के रक्षा मंत्री आजकल चर्चा में हैं। धोती और कुर्ता पहनने वाले रक्षा मंत्री नए लुक में काफी स्मार्ट हैं। शानदार गॉगल, फाइटर पायलट का ड्रेस, कॉकपिट में बैठे राजनाथ, समुद्र में युद्धपोत से फायरिंग करते राजनाथ सिंह, तस्वीरें हैं कि मीडिया में छाई हुई हैं। राजनाथ की फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान शस्त्र पूजा पर हरियाणा की जनसभा में भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बोल रहे हैं। राजनाथ सिंह देश के पांच साल गृहमंत्री रहे, इस दौरान उनकी छवि केवल कड़ी निंदा करने, सख्त चेतावनी देने वाले मंत्री की ही बन गई थी। कई बार वह खुद में माहौल में बोझिल नजर आते थे, लेकिन मोदी सरकार 2.0 में रक्षा मंत्री बनने के बाद से उन्होंने पहचान बदल ली है।
जम्मू-कश्मीर में वैधानिक बदलाव का कदम उठाते ही रक्षा मंत्री ने कूटनीति पर भी बयान दे दिया था। उन्होंने कहा था कि अब पाकिस्तान से बात अब उसके कब्जे वाले कश्मीर पर होगी। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश में भी राजनाथ सिंह के प्रभाव ने काफी समीकरण बदला है। इस बार रक्षा प्रदर्शनी भी लखनऊ में ही आयोजित हो रही है। राजनाथ सिंह के इस बढ़ते प्रभाव पर एक भाजपा नेता ने भी गजब का तंज कसा है। सूत्र का कहना है कि कभी वह मोदी कैबिनेट में नाम के नंबर दो थे, अब वह काम के नंबर दो हैं।
पिछले साल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इंद्रप्रस्थ रामलीला समिति में दशहरे के दौरान पिता और परिवार के साथ उपस्थित होकर खूब टीआरपी बटोरी थी। इस बार टॉपते रह गए। रामलीला में दशहरे के दिन रावण वध को लेकर खूब राजनीति हुई। सूत्र बताते हैं कि लाल किला की धार्मिक राम लीला समिति में दो बार झटका खाए (एक बार धनुष टूटा) प्रधानमंत्री ने इस बार द्वारका का रुख कर लिया। लाल किला में दशहरा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी की मौजूदगी में संपन्न हो गया।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के हाथ में हनीट्रैप के बहाने बटेर लग गई है। राजनीति के चतुर खिलाड़ी इस हनीट्रैप कांड का भरपूर लाभ लेने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं। हालांकि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने कमलनाथ सरकार को लताड़ लगाते हुए इस मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को सौंपने के लिए कहा है, लेकिन कमलनाथ सरकार इस स्थिति से बचना चाह रही है। ऐसा हुआ तो कमलनाथ सरकार को चाबी हाथ से निकल जाने का खतरा सता रहा है। इसके भी दो कारण हैं, पहला सीबीआई पीएमओ के अधीन आती है, दूसरे सीबीआई के चीफ ऋषि प्रकाश शुक्ला हैं।
शुक्ला से कमलनाथ सरकार की पटरी नहीं बैठ पाई थी। इसलिए कमलनाथ म.प्र. एसआईटी से ही जांच कराना चाहते हैं। यह बात अलग है कि पिछले दस दिनों में कमलनाथ ने तीन एसआईटी प्रमुख को बदल दिया है। पहले डी श्रीनिवासन एसआईटी प्रमुख थे। कमलनाथ सरकार ने इनके नाम की घोषणा करने के 24 घंटे के भीतर ही श्रीनिवासन को बदलकर संजीव शमी को एसआईटी हेड बना दिया। शमी बमुश्किल दो-तीन दिन काम कर पाए कि इस पोस्ट पर अब राजेन्द्र कुमार की नियुक्ति हो गई है।
आरोप भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष ने लगाया है। उन्होंने यह शिकायत प्रदेश के अध्यक्ष दिलीप घोष और केंद्रीय भाजपा मुख्यालय से भी की है। भाजपा के कई नेताओं ने अपनी पार्टी को आगाह किया है कि वह तृणमूल कांग्रेस के विभीषणों से बचें। पार्टी के एक बड़े नेता का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस के नारदा, शारदा चिटफंड घोटाले में लिप्त और खराब छवि वाले तमाम कलयुगी विभीषण भाजपा में आ रहे हैं। मुकुल राय का भी नाम तमाम घोटालों में है। इसी तरह से मैनुअल इस्लाम, सुब्रतो चट्टोपाध्याय समेत तमाम नेता भाजपा में आए हैं। बताते हैं इन नेताओं के आने से भाजपाई अपने लिए मुसीबत महसूस कर रहे हैं।
खबरचियों से पता चला है कि ये नेता पश्चिम बंगाल में भाजपा की अच्छी छवि का लाभ लेने के लिए तृणमूल को छोड़ रहे हैं। जबकि इनकी खुद ही छवि साफ पाक नहीं है। ऐसे में भाजपा नेताओं का कहना है कि जिन्हें ममता बनर्जी ने नेता बनाया वह ममता को धोखा दे रहे हैं तो इसकी क्या गारंटी कि कल यहां भी .....?