दरअसल बिहार में इसी साल अक्टूबर महीने में विधानसभा चुनाव होने हैं। विपक्षी दलों ने लॉकडाउन में फंसे बिहारी मजदूरों के मामले को मुद्दा बना लिया है। चूंकि पड़ोसी राज्य यूपी अपने मजदूरों-छात्रों को वापस बुलाना शुरू किया है, इसलिए विपक्षी दल सवाल पूछ रहे हैं कि ऐसा ही कदम नीतीश क्यों नहीं उठा रहे।
प्रवासी मजदूरों के बारे में भी सोचे सरकार
यूपी सरकार ने लॉकडाउन के कारण कोटा में फंसे 7500 छात्रों की सकुशल वापसी के लिए कई बसें भेजी हैं। यह स्वागत योग्य कदम है। बसपा भी इसकी सराहना करती है। लेकिन सरकार से अनुरोध है कि वह उन लाखों प्रवासी मजदूरों के परिवार की चिंता करे जो अपने घरों से दूर नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।’- मायावती, बसपा प्रमुख
लॉकडाउन का पाठ सिखा रहे नीतीश
‘बिहार के लोग देश के विभिन्न राज्यों में फंसे हुए हैं, लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री केवल लॉकडाउन के सिद्धांतों का पाठ सिखा रहे हैं। विभिन्न राज्य सरकारें शायद कुछ कर रही हों, लेकिन नीतीश कुमार ने संबंधित राज्य सरकारों से बात तक नहीं की। यहां तक कि उन्होंने पीएम के साथ हुई मुख्यमंत्रियों की बैठक में भी इस मुद्दे को नहीं उठाया।’ - प्रशांत किशोर, पूर्व जेडीयू उपाध्यक्ष