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450 भारतीयों पर होना चाहिए एक पुलिसकर्मी, असल आंकड़ा है निराशाजनक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Fri, 09 Aug 2019 05:09 PM IST
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पुलिस और जनसंख्या का अनुपात - फोटो : Shutterstock

देश में बढ़ते अपराधों के बीच आम लोगों की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों की कमी लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। आंतरिक सुरक्षा की कमान संभालने वाली पुलिस की तैनाती को लेकर सामने आई ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डवलपमेंट की रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अपराध पर लगाम लगाने के लिए भारत में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल नहीं है। जिससे अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के मानक के अनुसार प्रति एक लाख नागरिक पर 222 पुलिसकर्मी होने चाहिए, लेकिन भारत में यह आंकड़ा 144 ही है। मतलब, हर 450 भारतीयों पर एक पुलिसकर्मी की तैनाती होनी चाहिए लेकिन यह आंकड़ा बढ़कर 694 हो गया है।



गृह मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार देश में पुलिसकर्मियों की कुल स्वीकृत क्षमता के करीब एक-चौथाई पद खाली हैं। इन पदों की संख्या 5.28 के आस-पास है। इन खाली पड़े पदों में सबसे ज्यादा संख्या उत्तर प्रदेश की है जहां कुल स्वीकृत पुलिसकर्मियों की संख्या में 1.29 लाख पद खाली हैं। यहां कुल पुलिस बल की स्वीकृत क्षमता 23,79,728 हैं, जिनमें से 18,51,332 की तैनाती है।

दूसरे स्थान पर बिहार है जहां 50 हजार 291 पद खाली हैं। तीसरे स्थान पर काबिज पश्चिम बंगाल में 48 हजार 981 रिक्त पद हैं। जबकि चौथा स्थान तेलंगाना को मिला है जहां स्वीकृत 76 हजार 407 हैं और 30 हजार 345 पद खाली हैं।

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पुलिस और जनसंख्या का अनुपात - फोटो : Shutterstock
देश में बढ़ते अपराधों के बीच आम लोगों की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों की कमी लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। आंतरिक सुरक्षा की कमान संभालने वाली पुलिस की तैनाती को लेकर सामने आई ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डवलपमेंट की रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अपराध पर लगाम लगाने के लिए भारत में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल नहीं है। जिससे अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के मानक के अनुसार प्रति एक लाख नागरिक पर 222 पुलिसकर्मी होने चाहिए, लेकिन भारत में यह आंकड़ा 144 ही है। मतलब, हर 450 भारतीयों पर एक पुलिसकर्मी की तैनाती होनी चाहिए लेकिन यह आंकड़ा बढ़कर 694 हो गया है।

गृह मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार देश में पुलिसकर्मियों की कुल स्वीकृत क्षमता के करीब एक-चौथाई पद खाली हैं। इन पदों की संख्या 5.28 के आस-पास है। इन खाली पड़े पदों में सबसे ज्यादा संख्या उत्तर प्रदेश की है जहां कुल स्वीकृत पुलिसकर्मियों की संख्या में 1.29 लाख पद खाली हैं। यहां कुल पुलिस बल की स्वीकृत क्षमता 23,79,728 हैं, जिनमें से 18,51,332 की तैनाती है।

दूसरे स्थान पर बिहार है जहां 50 हजार 291 पद खाली हैं। तीसरे स्थान पर काबिज पश्चिम बंगाल में 48 हजार 981 रिक्त पद हैं। जबकि चौथा स्थान तेलंगाना को मिला है जहां स्वीकृत 76 हजार 407 हैं और 30 हजार 345 पद खाली हैं।

महिला थानों की संख्या हर राज्य में कम

पुलिस एवं जनसंख्या का अनुपात - फोटो : Shutterstock
ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट के आंकड़ों के अनुसार, महिला थानों की संख्या भारत के हर राज्य में बेहद कम हैं। देश में कई थाने तो ऐसे भी हैं जहां एक भी महिला पुलिसकर्मी तैनात नहीं है। इस कारण महिला अपराधों की जांच भी विलंब से होती है। कई बार तो महिला अपराधियों को पकड़ने के लिए फोर्स तक उपलब्ध नहीं होता।

पुलिस पर लगातार बढ़ रहा लोगों का अविश्वास

पुलिस पर लोगों का अविश्वास भी तेजी से बढ़ रहा है। अविश्वास बढ़ने का एक बड़ा कारण यह भी है कि पुलिस के साथ बातचीत अधिकतर निराशाजनक, समय लेने वाली और महंगी होती है। पुलिस में व्याप्त भष्टाचार, कठोर रूख, न्याय में देरी लोगों को कानून-व्यवस्था से दूर कर रही है।

नवीनतम उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2016 में दर्ज सभी मामलों में से 30 फीसदी मामले साल के अंत तक जांच के लिए लंबित थे। न्याय में देरी भी लोगों के भीतर अविश्वास को बढ़ा रही है।

भारत के राज्यों में प्रति एक लाख जनसंख्या पर पुलिसकर्मियों की संख्या

  • जम्मू और कश्मीर- 544
  • हिमाचल प्रदेश- 218
  • पंजाब- 268
  • हरियाणा- 157
  • उत्तराखंड- 177
  • राजस्थान- 116
  • मध्यप्रदेश- 121
  • उत्तर प्रदेश- 89
  • गुजरात- 113 
  • कर्नाटक- 136
  • केरल- 182
  • तमिलनाडु- 162
  • तेलंगाना- 123
  • आंध्र प्रदेश- 94
  • ओडिशा- 125
  • छत्तीसगढ़- 205
  • झारखंड- 159
  • बिहार- 65
  • पश्चिम बंगाल- 97
  • सिक्किम- 821
  • असम- 161
  • मेघालय- 356
  • अरुणाचल प्रदेश- 727
  • नागालैंड- 1171
  • मणिपुर- 830
  • मिजोरम- 606
  • त्रिपुरा- 596
  • अंडमान निकोबार- 994 

विश्व में प्रति एक लाख व्यक्तियों पर तैनात पुलिसकर्मियों की संख्या

पुलिस और जनसंख्या का अनुपात - फोटो : Shutterstock
  • ग्रेनेडा- 864
  • अर्जेंटीना-803
  • उरुग्वे- 677
  • मोंटेनिग्रो- 651
  • भूटान- 536
  • माल्टा- 506
  • बाराबडोस- 494
  • क्रोएशिया- 489
  • ट्रिनिनाड एंड टोबैगो- 486
  • सर्बिया- 479
  • ग्रीस- 479
  • इटली- 462
  • रूस- 416
  • स्पेन- 362
  • नीदरलैंड- 358
  • मेक्सिको- 343
  • फ्रांस- 330
  • थाइलैंड- 320
  • जर्मनी- 300
  • दक्षिण कोरिया- 229
  • यूके- 226
  • स्विटजरलैंड- 218
  • यूएसए- 207
  • स्वीडन- 199
  • कनाडा- 188
  • फिलिपींस- 174
  • भारत- 144
(स्त्रोत- संयुक्त राष्ट्र डाटा)

पर्याप्त पुलिस बल वाले देशों की सूची में भारत का स्थान 27वां

पर्याप्त पुलिस बल वाले देशों की सूची में भारत का स्थान विश्व में 27वां है। इस सूची में पहले स्थान पर कैरेबियन देश ग्रेनेडा है जबकि दूसरे स्थान पर अर्जेंटीना और तीसरे पर उरुग्वे है।

किस राज्य में कितने पद खाली 

पुलिस और जनसंख्या का अनुपात - फोटो : Shutterstock
  • जम्मू और कश्मीर: 10 हजार 44 पद
  • असम: 11 हजार 452 पद
  • कर्नाटक : 21 हजार 943 पद
  • उत्तर प्रदेश : 1 लाख 28 हजार 952 पद
  • बिहार : 50 हजार 291 पद 
  • ओडिशा : 10,322 पद
  • छत्तीसगढ़ :11,916 पद
  • हरियाणा : 16,844 पद 
  • आंध्र प्रदेश : 17 हजार 933 पद
  • राजस्थान :18 हजार 3 पद
  • पश्चिम बंगाल : 48 हजार 981 पद
  • तेलंगाना : 30 हजार 345 पद
  • महाराष्ट्र : 26 हजार 195 पद
  • मध्य प्रदेश : 22 हजार 355 पद
  • गुजरात : 21,070 पद
  • झारखंड : 18 हजार 931 पद
  • तमिलनाडु : 22 हजार 420 पद
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