नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने नीरव मोदी, मेहुल चोकसी समेत 60 से अधिक कंपनियों की संपत्तियों की बिक्री पर रोक लगा दी है। मेहुल और चोकसी पीएनबी के 12700 करोड़ रुपये के घोटाले में मुख्य आरोपी हैं। यह कदम कारपोरेट मामलों के मंत्रालय की अपील पर कंपनी एक्ट 2013 की विभिन्न धाराओं के तहत उठाया गया है।
मंत्रालय ने इस एक्ट की धारा 221 और 222 समेत कई प्रावधानों के तहत एनसीएलटी में अपील की थी। धारा 221 के तहत पूछताछ और जांच के दौरान कंपनी की संपत्तियों को फ्रीज कर दिया जाता है जबकि धारा 222 प्रतिभूतियों पर रोक लगाने से संबंधित है।
एनसीएलटी ने 64 कंपनियों के खिलाफ आदेश पारित किया है। इसमें नीरव, मेहुल, पीएनबी से जुड़े कुछ लोगों, विभिन्न कंपनियों और लिमिटेड लाइएबिलिटी पार्टनरशिप शामिल हैं। प्रतिबंधित की गई कंपनियों में गीतांजलि जेम्स, गिली इंडिया, नक्षत्र ब्रांड और फायरस्टार डायमंड भी शामिल हैं। साथ ही इसमें साझेदार कंपनियां सोलर एक्सपोर्ट और स्टेलर डायमंड भी हैं।
मंत्रालय के अनुसार, 23 फरवरी को एनसीएलटी की मुंबई शाखा में तत्काल सुनवाई के लिए याचिका दायर की गई थी और इसी के आधार पर यह आदेश जारी किया गया है। अगले आदेश तक इन कंपनियों की रकम, संपत्तियों को हटाने, हस्तांतरण या निपटान पर रोक रहेगी। एनसीएलटी इस मामले पर 26 मार्च को सुनवाई करेगी। पीएनबी घोटाले की सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय के साथ ही गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय भी जांच कर रहा है।