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सुप्रीम कोर्ट: पीएमएलए से जुड़ी याचिका अदालत ने की खारिज, पुराने फैसले की समीक्षा करने की थी मांग

Wed, 27 Mar 2024 09:01 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पैसले की समीक्षा की मांग करने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया है। जिसमें कहा गया था कि किसी व्यक्ति पर आपराधिक साजिश रचने पर धन शोधन निवारण अधिनियम(पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है। पहले शीर्ष अदालत ने नवंबर 2023 में कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील पर फैसला सुनाया था। जानें क्या है मामला....
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले की समीक्षा की मांग करने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया है। जिसमें कहा गया था कि किसी व्यक्ति पर आपराधिक साजिश रचने पर धन शोधन निवारण अधिनियम(पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है। आईपीसी की धारा 120 बी में आपराधिक साजिश के लिए सजा का प्रावधान है।
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29 नवंबर के फैसले की समीक्षा की मांग वाली याचिका खारिज
न्यायाधीश की पीठ ने 29 नवंबर, 2023 के फैसले की समीक्षा की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें यह भी कहा गया था कि यह जरूरी नहीं है कि जिस व्यक्ति के खिलाफ पीएमएलए की धारा 3 के तहत अपराध का आरोप है, उसे इस रूप में दिखाया जाना चाहिए।  पीठ ने अपने हालिया आदेश में कहा कि खुली अदालत में समीक्षा याचिकाओं की सुनवाई की मांग करने वाले आवेदन खारिज कर दिए जाते हैं। हमने 29 नवंबर, 2023 के फैसले और आदेश का अवलोकन किया है, जिसकी समीक्षा करने की मांग की गई है। 29 नवंबर को शीर्ष अदालत ने कहा था आईपीसी की धारा 120 बी के तहत दंडनीय अपराध तभी अनुसूचित अपराध बनेगा, जब कथित साजिश एक अपराध करने की हो जो विशेष रूप से अनुसूची में शामिल है।

फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने PMLA के प्रावधानों की व्याख्या
फैसले में शीर्ष अदालत ने पीएमएलए के प्रावधानों की व्याख्या की थी और कहा था कि विधायिका की मंशा को प्रभावी करते हुए यदि किसी दंडात्मक कानून के किसी विशेष प्रावधान की दो उचित व्याख्याएं दी जा सकती हैं, तो अदालत को आम तौर पर उस व्याख्या को अपनाना चाहिए जो इससे बचती है। दूसरे शब्दों में, दोनों की अधिक उदार व्याख्या को अपनाने की जरूरत है। 
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पीएमएलए की धारा 2 की उप-धारा (1) के खंड (वाई) के तहत अनुसूचित अपराध की परिभाषा से जो विधायी इरादा इकट्ठा किया जा सकता है, वह यह है कि प्रत्येक अपराध जो अपराध की आय उत्पन्न कर सकता है, उसे अपराध होने की आवश्यकता नहीं है। इसलिए, केवल कुछ विशिष्ट अपराधों को ही अनुसूची में शामिल किया गया है। पीठ ने कहा था कि पीएमएलए में शामिल अपराध से किसी भी संबंध के बिना, आपराधिक साजिश को अपने आप में एक अनुसूचित अपराध की अनुमति देना, अनुसूची को अर्थहीन या अनावश्यक बना देगा। पीठ ने कहा था कि केवल इसलिए कि किसी अपराध को करने की साजिश रची गई है, वह गंभीर अपराध नहीं बन जाता।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था फैसला
शीर्ष अदालत ने नवंबर 2023 में कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील पर फैसला सुनाया था, जिसने एक महिला के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया था, जो एलायंस यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति थी। ईडी ने आईपीसी की धारा 120बी लागू करके पीएमएलए के प्रावधानों के तहत उसके खिलाफ मामला दर्ज किया था, हालांकि जिन अपराधों के लिए आरोपी पर आरोप लगाया गया था, वे अनुसूचित अपराध नहीं थे।
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