प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "संघ के बारे में कहा जाता है कि इसमें सामान्य लोग मिलकर असामान्य और अभूतपूर्व कार्य करते हैं। व्यक्ति निर्माण की ये सुंदर प्रक्रिया हम आज भी संघ की शाखाओं में देखते हैं। संघ शाखा का मैदान एक ऐसी प्रेरणा भूमि है, जहां स्वयंसेवक की अहं से वयं तक की यात्रा शुरु होती है। संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण की यज्ञ वेदी है। राष्ट्र निर्माण का महान उद्देश्य, व्यक्ति निर्माण का स्पष्ट पथ, शाखा जैसी सरल, जीवंत कार्यपद्धति। यही संघ की सौ वर्षों की यात्रा का आधार बने। संघ ने कितने ही बलिदान दिये। लेकिन भाव एक ही रहा - राष्ट्र प्रथम... लक्ष्य एक ही रहा -'एक भारत, श्रेष्ठ भारत'।"
पीएम ने कहा कि संघ प्रारंभ से राष्ट्रभक्ति और सेवा का पर्याय रहा है। जब विभाजन की पीड़ा ने लाखों परिवारों को बेघर कर दिया तब स्वयंसेवकों ने शरणार्थियों की सेवा की। समाज के साथ एकात्मता और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति आस्था ने संघ के स्वयंसेवकों को हर संकट में स्थितप्रज्ञ रखा है, समाज के प्रति संवेदनशील बनाए रखा है।
'सरकारों ने लंबे समय तक संघ को नहीं दी प्राथमिकता'
प्रधानमंत्री मोदी ने संघ से जुड़े कार्यकर्ताओं की विशेषता बताते हुए कहा, "खुद कष्ट उठाकर दूसरों के दुख हरना। ये हर स्वयंसेवक की पहचान है। संघ देश के उन क्षेत्रों में भी कार्य करता रहा है जो दुर्गम हैं, जहां पहुंचना सबसे कठिन है। हमारे देश में लगभग 10 करोड़ आदिवासी भाई-बहन हैं। जिनके कल्याण के लिए संघ लगातार प्रयासरत है। लंबे समय तक सरकारों ने उन्हें प्राथमिकता नहीं दी, लेकिन संघ ने उनकी संस्कृति, उनके पर्व उत्सव, उनकी भाषा और परंपराओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। सेवा भारती, विद्या भारती, एकल विद्यालय, वनवासी कल्याण आश्रम आदवासी समाज के सशक्तिकरण का स्तंभ बनकर उभरे हैं।