प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक बार फिर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। बीदर-कलाबुर्गी रेलवे लाइन का उद्घाटन करने के बाद मोदी ने कहा कि अटकाना, लटकाना और भटकाना कांग्रेस की कार्यशैली रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा 'पिछली सरकार ने समय पर इस प्रोजेक्ट के लिए फंड जारी किया होता तो यह 7 साल पहले पूरा हो जाता।'
बता दें कि इस प्रोजेक्ट की आधारशीला 1996 में रखी गई थी और फिर फंड की कमी के चलते काम लटका रहा। इस देरी के चलते 370 करोड़ के प्रोजेक्ट की लागत बढ़कर 1,542 करोड़ हो गई।
गुजरात की बाढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि 'इस साल जब गुजरात में बाढ़ से हालात खराब थे तब कांग्रेस के नेता लोगों की मदद करने की जगह बंगलूरू में आकर बैठ गए थे।'
मैंने लाल किले से ऐलान किया था कि हम 1 हजार दिनों में 18000 घरों में बिजली देंगे और अभी तो 1000 दिन भी पूरे नहीं हुए और 15000 घरों तक बिजली पहुंचा दी गई है। हमने तीन लाख फर्जी कंपनियों पर ताला लगाया है।
कश्मीर पर कांग्रेस की भाषा पाकिस्तानी
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की भाषा बोल रही है। आखिर क्यों कांग्रेस के नेता कश्मीर की आजादी मांगने वालों का साथ दे रहे हैं। कल कांग्रेस के नेता की कश्मीर की आजादी को लेकर दिए गए बयान से साफ है कि कांग्रेस सर्जिकल स्ट्राइक और हमारे जवानों के बारे में क्या सोचती है।'
बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा था कि कश्मीरी आजादी नहीं बल्कि स्वायत्तता चाहते हैं। हालांकि कांग्रेस ने चिदंबरम के बयान से किनारा कर लिया है।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा 'अचानक जो कल तक सत्ता में बैठे थे वो अब यू टर्न ले रहे हैं और बेशर्मी के साथ बयान दे रहे हैं। क्यों कश्मीर की आजादी के साथ अपना स्वर मिला रहे हैं।'
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उन्होंने कहा कि 'क्या ऐसे लोग जो देश के वीरों के बलिदान पर अपनी राजनीति करने पर तुले हुए हैं ऐसे लोगों से देश का भला हो सकता है? हम देश की एकता और अखंडा के साथ समझौता करेंगे भी नहीं और होने भी नहीं देंगे।'
पीएम ने कहा लग रहा था एक के बाद हार के बाद कांग्रेस में समझदार लोग पार्टी को सही रास्ते पर लाने का प्रयास करेंगे, लेकिन एक बाद एक घटनाएं और उनका गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार देख रहा हूं साफ है कि कांग्रेस सुधरना ही नहीं चाहती।'
डोकलाम मुद्दे पर पीएम ने कहा कि 'पूरी दुनिया ने देखा, चीन कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो लेकिन धैर्य की कसौटी पर भारत खरा उतरा है।'