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प्रधानमंत्री मोदी ने सेना को सौंपी अचूक निशाने वाले अर्जुन टैंक की चाबी, जानें इसकी खासियत

Sun, 14 Feb 2021 12:12 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
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सेनाध्यक्ष को अर्जुन टैंक की चाबी देते हुए पीएम मोदी - फोटो : ANI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई पहुंचे हैं। यहां प्रधानमंत्री मोदी ने सेना को और ताकतवर बनाने के लिए सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे को युद्धक टैंक अर्जुन (एमके-1ए) की चाबी सौंपी है। इसी के साथ सेना में 118 उन्नत अर्जुन टैंक शामिल किए जाएंगे। आइए बताते हैं कि अचूक निशाने वाले स्वदेश में निर्मित अर्जुन टैंक की खासियत...

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में आयोजित एक समारोह में उन्होंने इस अत्याधुनिक टैंक की सलामी भी स्वीकार की। रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) के यहां स्थित युद्धक वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान द्वारा निर्मित इस अत्याधुनिक टैंक का डिजाइन देश में ही तैयार और विकसित किया गया है। पूरी तरह स्वदेश में निर्मित अर्जुन टैंक के इस उन्नत संस्करण का निशाना अचूक बताया जा रहा है, जिससे भारतीय सेना की जमीन पर मारक क्षमता को और ज्यादा मजबूती मिलेगी।



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अर्जुन टैंक - फोटो : ANI
डिजाइन तैयार करने वाले रेड्डी ने की प्रशंसा
अर्जुन टैंक का डिजाइन तैयार करने वाले रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) के चेयरमैन जी. सतीश रेड्डी ने प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से अर्जुन एमके-1ए को देश को समर्पित करने का फैसला लेने की प्रशंसा की है। रक्षा शोध व विकास सचिव की भी जिम्मेदारी संभाल रहे रेड्डी ने बताया कि नए संस्करण में 71 अतिरिक्त फीचर जोड़े गए हैं, जो इसे दुनिया के सभी श्रेष्ठ टैंकों के समकक्ष खड़ा करते हैं। बता दें कि हाल ही में रक्षा मंत्रालय की बैठक में 118 उन्नत अर्जुन टैंक सेना में शामिल करने को मंजूरी दी गई थी। 
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Arjun tank - फोटो : ANI
अर्जुन टैंक की खासियत
डीआरडीओ ने अर्जुन टैंक की फायर पावर क्षमता को काफी बढ़ाया है। अर्जुन टैंक में नई टेक्नोलॉजी का ट्रांसमिशन सिस्टम है। इससे अर्जुन टैंक आसानी से अपने लक्ष्य को ढूंढ लेता है। अर्जुन टैंक युद्ध के मैदान में बिछाई गई माइंस हटाकर आसानी से आगे बढ़ने में सक्षम है। अर्जुन टैंक में केमिकल अटैक से बचने के लिए स्पेशल सेंसर लगे हैं।

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आर्मी टैंक
2012 में मंजूरी, 2021 में मिलेगा पहला टैंक
118 उन्नत अर्जुन टैंक खरीदने को 2012 में मंजूरी दी गई थी और 2014 में रक्षा खरीद समिति ने इसके लिए 6600 करोड़ रुपये भी जारी कर दिए थे। लेकिन इसकी फायर क्षमता समेत कई पक्षों पर सेना ने सुधार की मांग की थी। इस बीच सेना ने 2015 में रूस से 14000 करोड़ रुपये में 464 मध्यम वजन के टी-90 टैंक की खरीद का सौदा कर लिया था। सेना की मांग के आधार पर उन्नत किए जाने के बाद अर्जुन टैंक मार्क-1ए को 2020 में हरी झंडी मिली थी।
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आर्मी टैंक - फोटो : army-technology.com
पहले से 124 अर्जुन टैंक हैं सेना में
भारतीय सेना के बेड़े में 124 अर्जुन टैंकों की एक रेजीमेंट पहले से ही साल 2004 में शामिल की जा चुकी है, जो पश्चिमी रेगिस्तान में तैनात है। लेकिन ये अर्जुन टैंक पुराने मॉडल के हैं, जिनमें करीब 72 तरह के सुधार की आवश्यकता भारतीय सेना ने जताई थी। इसके बाद डीआरडीओ ने नए संस्करण को तैयार किया है। अब शामिल किए जा रहे 118 अर्जुन टैंक अतिरिक्त फीचर वाले हैं और पहले से ज्यादा मारक क्षमता वाले हैं। इनके लिए एक और बख्तरबंद रेजीमेंट बनाई जाएगी।
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आर्मी टैंक

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- फोटो : army-technology.com
अर्जुन सीरीज का आखिरी बैच
118 अर्जुन मार्क-1ए टैंक इस सीरीज का आखिरी बैच होेंगे। दरअसल अर्जुन टैंक के करीब 68 टन वजनी होने को भारतीय सेना समस्या मानती है। खासतौर पर चीन के खिलाफ लद्दाख व अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में इस टैंक को तैनात नहीं किया जा सकता है। वहां के लिए सेना 20 से 25 टन के हल्के और 30  से 50 टन वजन के मध्यम टैंक की आवश्यकता जता चुकी है। 
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