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प्रधानमंत्री मोदी जी... 'उपचुनाव के नतीजे नहीं जनता की चीख कान लगाकर सुनिए'

Thu, 15 Mar 2018 11:08 AM IST
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : फाइल फोटो
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत पूरा कैबिनेट गोरखपुर में डेरा जमाए बैठा रहा और भाजपा के उम्मीदवार उपेन्द्र शुक्ला लोकसभा उपचुनाव हार गए।  फूलपुर में सिद्धार्थनाथ सिंह, केशव प्रसाद मौर्या समेत अन्य ने पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन यहां भी मुंह की खानी पड़ी। यही हाल बिहार के अररिया में हुआ। 

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तस्लीमुद्दीन की मृत्यु से खाली हुई सीट पर उनके बेटे राजद के टिकट पर सरफराज आलम चुनाव लड़े, भाजपा ने अपने प्रत्याशी प्रदीप सिंह को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के भरपूर सहयोग के बाद भी तीनों सीटों पर भाजपा के हाथ खाली रहे। सत्तापक्ष को जहां जवाब नहीं सूझ रहा है, वहीं विपक्ष जीत का जश्न मना रहा है।

राहुल का ट्वीट
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस पर ट्वीट किया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने उपचुनाव जीतने वालों को बधाई दी है। उन्होंने नतीजे पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि इससे साफ है कि मतदाताओं में भाजपा के प्रति बहुत क्रोध है और वो उस गैर भाजपाई के लिए वोट करेंगे, जिसके जीत की संभावना काफी ज्यादा हो। कांग्रेस उ.प्र. में नव निर्माण के लिए तत्पर है और यह रातोंरात नहीं होगा। वहीं सपा और बसपा नेताओं की बाछें खिल गई है। 
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बसपा के एक वरिष्ठ नेता, पूर्व राज्यसभा सदस्य और मायावती के करीबी सूत्र ने उपचुनाव को लेकर ऑफ द रिकार्ड प्रतिक्रिया दी है। सूत्र का कहना है कि वह प्रतिक्रिया के लिए अधिकृत नहीं हैं और बहुत हद तक संभव है मायावती खुद प्रेस कांफ्रेंस करें। बसपा नेता का कहना है कि जो लोग उ.प्र. में बसपा को खत्म मान कर चल रहे थे उन्हें उपचुनाव के नतीजे को गंभीरता से लेना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर कटाक्ष करते हुए वरिष्ठ नेता ने कहा कि उन्हें उपचुनाव के नतीजे में कान लगाकर जनता की चीख सुननी चाहिए।

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क्या कहते हैं उ.प्र. उपचुनाव के नतीजे

गोरखपुर
गोरखपुर की सीट भाजपा का अभेद्य किला बन चुकी थी। महंत अवैद्यनाथ के जमाने से गोरखनाथ मंदिर के उम्मीदवार के आगे कोई टिका नहीं। 1998 में अवैद्यनाथ के वारिस के तौर पर योगी आदित्यनाथ प्रत्याशी बने। वह 1998,1999, 2004, 2009, 2014 का चुनाव जीतने में सफल रहे। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें लोकसभा सीट छोडऩी पड़ी। 2018 में उपचुनाव हुआ और भाजपा ने लगातार उनके आदित्यनाथ के कोप का भाजन रहे उपेन्द्र शुक्ला को उम्मीदवार बनाया। 

योगी आदित्यनाथ और उनकी राजनीति को करीब से जानने वालों का मानना है कि उपेन्द्र शुक्ला की उम्मीदवारी योगी के लिए गले के नीचे उतरने वाली बात नहीं थी। इसके लिए दशक भर से अधिक समय पहले सहजनवां में योगी द्वारा उपेन्द्र के साथ किए गए व्यवहार को याद किया जाता है। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जमकर उपेन्द्र शुक्ला के पक्ष में प्रचार किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उपचुनाव में प्रचार से दूरी बनाए रखी और अंतत: उपेन्द्र शुक्ला चुनाव हार गए। राजनीति का संक्षेप यह कि योगी ने जमकर मेहनत की लेकिन वह मंदिर के बाहर के उम्मीदवार को लोकसभा उपचुनाव में नहीं जितवा पाए।

फूलपुर
आजादी के बाद से पहली यह सीट 2014 में भाजपा के खाते में गई थी। इसके दो बड़े कारण बताए जा रहे थे। पहला मोदी लहर और दूसरा बड़ा कारण केशव प्रसाद मोर्य का उम्मीदवार होना। अपना दल का भाजपा के साथ आना। फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में 22 प्रत्याशी मैदान में थे। भाजपा के कौशलेन्द्र पटेल, समाजवादी पार्टी के नागेन्द्र पटेल और कांग्रेस के मनीष मिश्रा प्रमुख थे।

 उ.प्र. सरकार के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस सीट को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था। उ.प्र. सरकार के कैबिनेट मंत्रियों, भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमकर मेहनत की। यहां भी प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव प्रचार नहीं किया और भाजपा का प्रत्याशी चुनाव हार गया। केशव प्रसाद मौर्य सदमे में है। उन्होंने प्रतिक्रिया दी है कि इतनी बड़ी तादाद में बसपा का वोट सपा प्रत्याशी के पक्ष में पड़ने का उन्हें अंदाजा ही नहीं था।

अररिया
बिहार की अररिया सीट पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री तस्लीमुद्दीन के बेटे सरफराज आलम राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर उम्मीदवार थे। सबसे बड़े स्टार प्रचारक तेजस्वी यादव ही थे। राजद प्रमुख लालू यादव जेल में हैं। यह नीतिश कुमार के भाजपा के साथ फिर से एनडीए में शामिल होने के बाद होने वाला पहला उपचुनाव था। भाजपा ने पूरा जोर लगा दिया, लेकिन सीट पर राष्ट्रीय जनता दल का पारंपरिक कब्जा बना रहा है।

जहानाबाद विधानसभा सीट से जद(यू)-भाजपा का हारना चौंकाता है। यह जद(यू) की सीट थी और राजद के साथ गठबंधन के बाद उसे इसपर सफलता मिली थी। लेकिन नीतिश के भाजपा के साथ जाने के बाद यह सीट राजद के पाले में चली गई। हालांकि भाजपा भागलपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव जीत गई है।
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