प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज महाबलीपुरम में लगी रक्षा प्रदर्शनी का उद्धाटन किया। देश में हथियारों का सबसे बड़ा मेला डिफेंस एक्सपो बुधवार से चेन्नई के बाहरी इलाके थिरुविदंदाई में शुरू हो गया। चार दिन तक चलने वाले एक्सपो में रक्षा साजोसामान बनाने वाली 670 से ज्यादा कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। इस बार भारत अपनी रक्षा निर्यात क्षमता दिखा रहा है। दसवें डिफेंस एक्सपो की थीम ‘इमर्जिंग डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब’ है।
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इस मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं चोल की धरती पर आकर बहुत खुश हूं। यह वही ऐतिहासिक शहर है जहां से शिक्षा और व्यापार के तार जुड़े हैं। पीएम एक्सपो में शामिल होने वाली कंपनियों को स्वागत करते हुए कहा कि मैं बहुत खुश हूं कि इस बार इस प्रदर्शनी में 500 से अधिक भारतीय कंपनियां भाग ले रहीं है जबकि 150 से अधिक विदेशी कंपनियों ने हिस्सा लिया है।
पीएम ने एक बार फिर इशारों इशारों में कांग्रेस काल पर तंज कसा और कहा कि आप लड़ाकू विमानों की खरीद की लंबी अवधि वाली प्रक्रिया को नहीं भूले होंगे जो अपने निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी लेकिन हमने इस मामले में कड़े कदम उठाए और 110 सेनानी एयरक्राफ्ट खरीद की नई पक्रिया भी शुरू कर दी गई है। पीएम ने कहा कि एक समय था जब रक्षा से जुड़े मामलों में आलस, अक्षमता की वजह से ढिलाई बरती जाती थी, इन मामलों के कुछ लोगों के निजी हित जुड़े होते थे जिसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है, न होगा और न होने देंगे।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में शांति के लिए हम प्रतिबद्ध हैं और यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की देश के नागरिक और हमारी टेरीटरी है। उन्होंने आगे कहा कि इसके लिए हम अपने सशस्त्र बलों को मजबूत बनाने के लिए हम सभी उपाय करने के लिए तैयार हैं। और इसी कड़ी में इंडीपेंडेट डिंफेंस इंडस्ट्रीयल कॉंपलेक्स की स्थापना भी शामिल है। पीएम ने कहा कि हम आने वाले समय में देश में दो डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का निर्माण करेंगे। इनमें से एक तमिलनाडु में और दूसरा उत्तर प्रदेश में बनाया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह ध्यान देने योग्य है कि रक्षा उत्पादन में छोटे और मध्यम क्षेत्र का योगदान पिछले 4 वर्षों में 200% बढ़ गया है।
बता दें कि आज प्रधानमंत्री एक दिन के उपवास पर हैं। लेकिन वह एक्सपो का उद्घाटन करने पहुंचे हैं। पीएम तमिलनाडु में भी कई कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। प्रधानमंत्री आज चेन्नई में एक कैंसर संस्थान का दौरा करेंगे। इसके अलावा कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का उद्घाटन करेंगे। क्सपो के उद्घाटन के दौरान डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने कहा कि एक्सपो में प्रदर्शित हो रही 50 फीसदी चीजें भारतीय मैनुफैक्चरर ने बनाई है जिसमें से अधिकर स्मॉल और मीडियम इंडस्ट्रीज द्वारा बनाई गईं हैं।
देश में हथियारों का सबसे बड़ा मेला डिफेंस एक्सपो बुधवार से चेन्नई के बाहरी इलाके थिरुविदंदाई में शुरू हो गया। चार दिन तक चलने वाले एक्सपो में रक्षा साजोसामान बनाने वाली 670 से ज्यादा कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। इस बार भारत अपनी रक्षा निर्यात क्षमता दिखा रहा है। दसवें डिफेंस एक्सपो की थीम ‘इमर्जिंग डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब’ है।
इसके अलावा, सबकी नजर भारतीय सेना के अरबों डॉलर के आधुनिकीकरण कार्यक्रम पर है। सरकार डिफेंस एक्सपो को भारतीय सेनाओं के ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में पहला गंभीर प्रयास दिखाने की कोशिश कर रही है। वह दुनिया में हथियारों एवं सैन्य उपकरणों की सबसे बड़े खरीदार को सैन्य साजोसामान के निर्माण का केंद्र बनाना चाहती है। भारत बड़े पैमाने पर रक्षा सामान निर्यात करने की तैयारी में है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक ट्वीट में कहा, ‘पहली बार डिफेंस एक्सपो में भारत अपनी रक्षा निर्यात क्षमता दिखाएगा।’
डिफेंस एक्सपो में भारत जल, थल, नभ के लिए स्वदेशी प्रणालियों का प्रदर्शन करेगा। हथियारों एवं रक्षा प्लेटफार्म के अलावा लड़ाकू विमान तेजस, डीआरडीओ द्वारा तैयार आधुनिक आर्टिलरी तोप सिस्टम (एटीएजीएस) अर्जुन मार्क 2 और धनुष का प्रदर्शन किया जाएगा। डीआरडीओ लांचर के साथ निर्भय मिसाइल सिस्टम, मानवरहित जमीनी वाहन (एयूजीवी), मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन मार्क-1, अस्त्र मिसाइल, कम ऊंचाई पर ले जाया जाने वाला रडार (एलएलटीआर) प्रणाली, मीडियम पावर रडार (एमपीआर) सिस्टम और पनडुब्बी रोधी मिसाइल वरुणास्त्र को भी प्रदर्शित करेगा।
300 अरब डॉलर के रक्षा सौदों पर नजर
ऐसा माना जा रहा है कि भारत अगले पांच साल में रक्षा उपकरणों की खरीद पर 300 अरब डॉलर खर्च करेगा। रक्षा उपकरण बनाने वाली दुनिया की सभी दिग्गज कंपनियां इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहती।
500 से ज्यादा भारतीय कंपनियां ले रही हिस्सा
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस एक्सपो में 670 से ज्यादा रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनियां हिस्सा ले रही है। इनमें से 154 विदेशी निर्माता हैं। डिफेंस एक्सपो में 47 देशों के आधिकारिक प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, अफगानिस्तान, स्वीडन, फिनलैंड, इटली, मेडागास्कर, म्यांमार, नेपाल, पुर्तगाल, सेशेल्स और वियतनाम शामिल हैं। रक्षा सचिव (उत्पादन) अजय कुमार ने बताया कि चीन को भी इसके लिए न्यौता भेजा गया था, लेकिन उन्होंने अपना प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा।
दुनिया की दिग्गज कंपनियां पहुंची
डिफेंस एक्सपो में दुनिया की कई दिग्गज रक्षा उत्पादन कंपनियां पहुंची हैं। इनमें लॉकहीड मार्टिन, बोइंग (अमेरिका), साब (स्वीडन), एयरबस, राफेल (फ्रांस), रोसोनबोरोन एक्सपोर्ट्स, यूनाइटेड शिपबिल्डिंग (रूस), बीएई सिस्टम्स (ब्रिटेन), सिबात (इस्राइल), वार्टशिला (फिनलैंड) और रोड एंड श्वार्ज (जर्मनी) शामिल हैं।