हालांकि इस सोशल मीडिया पर बवाल मचने के बाद साल 2016 में धोनी ने कंपनी से ब्रांड एम्बेसडर के तौर पर अपना नाता तोड़ लिया था, लेकिन इस दौरान धोनी और उनके परिवार वालों की इस मसले पर काफी किरकरी हुई थी। वहीं, कंपनी का कहना है कि रीयल्टी सेक्टर में मंदी के कारण उसकी बिक्री घट गई है और इस वजह से उसे प्रॉजेक्ट्स पूरे करने में मुश्किल हो रही है। पिछले साल बैंक ऑफ बड़ौदा ने आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT)में इन्सॉल्वंसी के लिए याचिका दायर की थी।
मालूम हो कि आम्रपाली ने 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की जीत के बाद टीम के प्रत्येक सदस्य को नोएडा एक्सटेंशन में आम्रपाली ड्रीम वैली प्रॉजेक्ट में एक विला तोहफे के तौर पर दिया था। धोनी टीम के कैप्टन थे इसलिए उन्हें 1 करोड़ रुपये की कीमत वाला और टीम के बाकी सदस्यों को 55 लाख रुपये प्रत्येक का विला दिया गया था। आम्रपाली ग्रुप को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 10 हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स में लगभग 40,000 फ्लैट की डिलीवरी देनी है, जो कब पूरी होगी उसे कह पाना फिलहाल तो मुश्किल है।