नंदन नीलेकणि का शुरुआती जीवन?
नंदन नीलेकणि का जन्म देश के आईटी हब कहे जाने वाले बेंगलुरु शहर में 2 जून, 1955 को हुआ था। इनकी शुरुआती पढ़ाई बिशप कॉटन बॉय स्कूल में हुई। वहीं इन्होंने अपने हाई स्कूल की पढ़ाई सेंट जॉसेफ हाई स्कूल से पूरी की। उसके बाद नंदन नीलेकणि ने अपने इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई आईआईटी बॉम्बे से पूरी की। खास बात यह है कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के दम पर आईआईटी बॉम्बे में दाखिला पाया था।
नारायण मूर्ति के साथ मिलकर की इंफोसिस की शुरुआत
साल 1978 में उनकी मुलाकात नारायण मूर्ति से होती है। इन दोनों की मुलाकात के बाद ही इंफोसिस की शुरुआत हुई। ये 80 का दशक था। उस दौरान आज के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप काफी अलग था। इस दौर में किसी स्टार्टअप का ग्रो करना काफी मुश्किल काम था। करीब 10 वर्षों तक इंफोसिस काफी मुश्किल हालातों में चलती रही। वहीं साल 1991 में भारतीय अर्थव्यवस्था में हुए मेजर रिफॉर्म ने मानों इंफोसिस को एक नया रास्ता दे दिया हो।
साल 1992 में इस कंपनी ने अपना आईपीओ स्टॉक मार्केट में लॉन्च किया। इसके बाद दुनिया भर में कई बड़ी कंपनियां इंफोसिस द्वारा बनाए सॉफ्टवेयर का उपयोग करने लगीं। यही नहीं इस दौरान कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन भी काफी तेजी से बढ़ने लगा था। साल 1999 में इंफोसिस NASDAQ पर लिस्ट होने वाली भारत की पहली कंपनी बनी। लिस्ट होने के तुरंत बाद इस कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन एक अरब डॉलर के बैंचमार्क को पार कर दिया। साल 2002 में नंदन नीलेकणि को कंपनी का सीईओ बनाया गया।
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने दी थी 'आधार' प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी
नंदन नीलेकणि की इसी काबिलियत को देखते हुए साल 2009 में तत्कालीन भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें यूआईडीएआई प्रोजेक्ट का चेयरमेन बनने के लिए आमंत्रित किया। नंदन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। डिजिटल इंडिया को आकार देने में यूआईडीएआई एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। आज दुनियाभर में आधार को सबसे बड़े बायोमीट्रिक सिस्टम के रूप में जाना जाता है। यूआईडीएआई हमारे बायोमेट्रिक डाटा को इकट्ठा करके इन्हें सेंट्रलाइज डाटा बेस में रखता है। आधार कार्ड आने के बाद आज कई सरकारी सेवाओं को बेहद ही कम समय में लोगों तक पहुंचाना संभव हो पाया है। आधार की मदद से आप ऑनलाइन पेमेंट, पेंशन आदि कई सेवाओं को बेहद ही कम समय में एक्सेस कर सकते हैं।
कांग्रेस से आजमा चुके हैं चुनाव में किस्मत
साल 2014 में नंदन नीलेकणि कांग्रेस की तरफ से लोकसभा चुनाव भी लड़े। इस चुनाव में वो भाजपा के उम्मीदवार अनंत कुमार से बड़े अंतर से हार गए। हालांकि, कांग्रेस के बाद बनी भाजपा सरकार में उनकी पहचान लगातार बढ़ती चली गई। मोदी सरकार में डिजिटल इंडिया को तेजी से बढ़ावा दिया गया। इसके चलते नंदन नीलेकणि सीधे पीएम मोदी के संपर्क में रहे। सरकार ने उन्हें कई जिम्मेदारियां दीं। इनमें डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने से लेकर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) स्कीम की निगरानी तंत्र के लिए उन्हें जिम्मेदारी दी गई है।
खुद नंदन नीलेकणि ने कुछ मौकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तकनीक को समझने की त्वरित क्षमता और उनकी कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी चर्चा के दौरान नए विचारों पर पूरा ध्यान केंद्रित करते हैं और आधुनिक टेक्नोलॉजी के विजन को तुरंत समझकर उसे लागू करने के लिए तत्पर रहते हैं। इतना ही नहीं 2019 के चुनाव से पहले उन्होंने चुनाव लड़ने को अपने जीवन को बड़ी गलती करार दिया था।
यूपीआई और फास्टैग को किया डिजाइन
आपको शायद ही पता होगा कि आज जिस यूपीआई सिस्टम से हम लोग ऑनलाइन भुगतान करते हैं, वह नंदन नीलेकणि द्वारा ही डिजाइन किया गया है। 2014 के बाद नंदन नीलेकणि ने भारत की डिजिटल पेमेंटिंग सिस्टम में क्रांति लाने के बारे में सोचा। यही नहीं स्टैंडर्डाइजिंग इलेक्ट्रॉनिक टोल सिस्टम को डिजाइन करने का काम भी नंदन नीलेकणि और उनकी टीम ने किया। ऐसे में ये कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि भारत में आधार, जीएसटी, यूपीआई, फास्टैग जैसे सिस्टम को भारत में लाकर उन्होंने डिजिटल इंडिया के सपने को साकार किया है।
ओएनडीसी प्रोजेक्ट पर भी किया काम
आज भी नंदन नीलेकणि देश को एक नया आकार देने के लिए कई काम कर रहे हैं। आज वो भारत सरकार के साथ मिलकर देश में फ्री एक्सिसेबल ऑनलाइन सिस्टम को डिजाइन कर रहे हैं, जहां पर व्यापारी और ग्राहक एक छोटी चीज से लेकर बड़ी-बड़ी चीजों को खरीद सकेंगे। इस प्रोजेक्ट का नाम ओएनडीसी
(ONDC Open Network For Digital Commerce) है, जो कि भारत में ई-कॉमर्स कंपनियों, जैसे- फ्लिपकार्ट और अमेजन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।