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मोदी लेकर आए बड़ी योजना, खत्म होगा सूखे का संकट!

Sat, 23 Apr 2016 07:51 AM IST
प्रशांत शर्मा/अमर उजाला, झांसी

सार

  • नदियों के जरिए नहरों में पानी देकर मरहम लगाने की कोशिश
  • बुंदेलखंड से होगा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का आगाज
  • चुनावी साल में भाजपा ने चला बड़ा दांव, पार्टी ने शुरू की तैयारियां
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Narendra modi - फोटो : Reuters
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विस्तार
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चुनावी साल में गर्माई उत्तर प्रदेश की राजनीति के बीच ‘सूखा’ बुंदेलखंड एक बार फिर केंद्र बिंदु में आ गया है। मोदी सरकार की चिंता में बुंदेलखंड किस कदर शामिल है इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि पीएम नरेंद्र मोदी खुद ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ (पीएमकेएसवाई) की शुरुआत बुंदेलखंड से करने जा रहे हैं। हालांकि, योजना की लांचिंग की तारीख फिलहॉल तय नहीं हुई है।
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पहले अतिवृष्टि और फिर सूखे ने बुंदेलखंड के किसानों को दोहरी मार दी है। एक ओर किसान आत्महत्या को मजबूर हो रहे हैं, वहीं पलायन भी थमने का नाम नहीं ले रहा। हॉलात ऐसे हैं कि गांव के गांव सूने पड़े हैं। ऐसे माहौल में भाजपा ने भी किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने का बड़ा राजनीतिक दांव चला है।

मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की भाजपा सरकार बुंदेलखंड की धरती से पीएमकेएसवाई की शुरुआत करने जा रही है। योजना की लांचिंग भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होगी। पूरी संभावना है कि योजना की शुरुआत बुंदेलखंड के केंद्र झांसी से हो। जल्द ही इसकी तिथि व स्थान की घोषणा हो सकती है।
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मालूम हो कि देश में कुल 14.2 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से 65 प्रतिशत में सिंचाई की सुविधा नहीं है। इस योजना का मकसद यह है कि सूखे खेतों में भी फसलें लहलहाएं। इस लिहाज से यह योजना महत्वपूर्ण है। पीएमकेएसवाई को पांच सालों के लिए 50 हजार करोड़ रुपये राशि का प्रावधान किया गया है।

यह है प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
- देश भर में सिंचाई में निवेश में एकरूपता लाना 
- ‘हर खेत को पानी’ के तहत कृषि योग्य क्षेत्र का विस्तार करना 
- खेतों में पानी के इस्तेमाल की दक्षता बढ़ाना 
- पानी का अपव्यय कम करना, पानी की हर बूंद का इस्तेमाल 
- फसल उत्पादन क्षमता बढ़ाकर किसानों का जीवनस्तर सुधारना
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प्रधानमंत्री कई बार कर चुके सूखे का जिक्र

पीएम मोदी - फोटो : pti
प्रधानमंत्री बुंदेलखंड की दुर्दशा से अच्छी तरह वाकिफ हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान बरेली की रैली में मोदी ने कहा था कि बुंदेलखंड में केन, बेतवा, यमुना, पहुज, मंदाकिनी जैसी नदियां बहने के बावजूद यह क्षेत्र भीषण सूखे की चपेट में है। पीएमकेएसवाई के जरिये मोदी चाहते हैं कि सूखी नहरों में भी लबालब पानी भरा हो और इनके पानी से सूखे खेतों में हरियाली लहलहाए। ताकि, किसानों की हॉलत सुधरे और उनका पलायन रुक सके। 

जल्द शुरू होगी केन-बेतवा नदी परियोजना
पीएमकेएसवाई के तहत केंद्र सरकार नदियों के जरिए बुंदेलखंड की नहरों का विकास करना चाहती है। इसके लिए रुकी हुई केन-बेतवा नदी परियोजना की जल्द शुरूआत होगी। बरुआसागर के तालाब को केंद्र बनाया गया है। योजना के पीछे सोच यह है कि बारिश का पानी संरक्षित किया जाए और इस पानी का उपयोग खेतों की सिंचाई में हो सके।

'पीएमकेएसवाई के संबंध में कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को मई के पहले सप्ताह से प्रशिक्षण दिया जाना है लेकिन खुद प्रधानमंत्री यहां से इसकी शुरुआत करेंगे, इसकी कोई औपचारिक जानकारी अभी नहीं मिली है।'
- अजय कुमार शुक्ला, जिलाधिकारी, झांसी

'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुंदेलखंड से योजना की शुरुआत करने पर सहमति जता दी है। हालांकि अभी योजना की लांचिंग की तिथि निर्धारित नहीं है। बुंदेलखंड के लिए यह प्रधानमंत्री की बड़ी सौगात होगी।'
- रत्नाकर पांडेय, क्षेत्रीय संगठन मंत्री
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