केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शुक्रवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन वर्षों से होती आ रहीं गतिविधियों का नतीजा है और भारत इसके लिए कतई जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कुल एतिहासिक उत्सर्जन का इतिहास महज तीन फीसदी है।
पेरिस समझौते के पांच वर्ष होने की पूर्व संध्या पर उन्होंने कहा, इस वक्त भारत का उत्सर्जन महज छह फीसदी है और देश ने राष्ट्रीय स्तर के दृढ़ संकल्प योगदान के सभी लक्ष्याें को करीब करीब हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा, जलवायु परिवर्तन रातों रात हुआ बदलाव नहीं है बल्कि इसका अस्तित्व सौ वर्षों से भी पुराना है। अतीत को देखें तो दुनिया भर के कुल उत्सर्जन का 25 फीसदी अकेले अमेरिका में होता रहा है। वहीं यूरोप में 22 और चीन के हिस्से में 13 फीसदी उत्सर्जन है। वहीं भारत का उत्सर्जन में योगदान महज 3 फीसदी है। इसलिए हम जलवायु परिवर्तन के लिए किसी सूरत में जिम्मेदार नहीं हैं।
भारत ने हमेशा अपनी जिम्मेदारी निभाई
जावड़ेकर ने कहा, जब भी जलवायु परिवर्तन को लेकर दुनिया ने गंभीर चिंतन कर कोई संकल्प लिया भारत ने हमेशा अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाई है। भारत सदैव उसके सामने आई सभी जलवायु चुनौतियों से लड़ा है। पांच साल पहले पेरिस समझौते में हमने 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता को 33-35 फीसदी कम करने के लिए प्रतिबद्धता जताई थी। इसमें 21 फीसदी हम पहले ही हासिल कर चुके हैं और अगले 10 वर्षों में शेष हासिल कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा, भारत उन गिने चुने देशों में शुमार है जिन्होंने पेरिस समझौते को लागू किया।
- 25 फीसदी कुल पृथ्वी का वन क्षेत्र भारत के हिस्से में है
- 2.4 फीसदी पृथ्वी के कुल क्षेत्रफल में है भारत
- 17 फीसदी विश्व की आबादी यहां बसती है
- 4 फीसदी दुनिया का शुद्ध जल संसाधन है भारत के पास
भारत वादा पूरा करने वाला जी20 का इकलौता सदस्य देश
जावड़ेकर ने जलवायु पारदर्शिता रिपोर्ट 2020 का हवाला देते हुए कहा कि जी20 देशों में भारत इकलौता है जिसने अपना वादा पूरा किया। यूएनईपी की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2019 में उत्सर्जन वृद्धि औसत से भी बहुत कम हुई। पिछले दशक की 3.3 फीसदी वार्षिक औसत वृद्धि के मुकाबले भारत में 2019 में महज 1.4 फीसदी उत्सर्जन वृद्धि दर्ज की गई।