भारत और मिस्र के द्विपक्षीय संबंधों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दो दिवसीय मिस्र का दौरा गेम चेंजर साबित हो सकता है। भारत इस उत्तरी-अफ्रीकी देश में निवेश बढ़ा सकता है और इसे ब्रिक्स में शामिल करवाने में मदद भी कर सकता है। दूसरी ओर, भारत को भी वैश्विक-दक्षिण में मजबूत आवाज बनने के साथ अफ्रीका, अरब एवं यूरोप के बाजारों में पैठ और गहरी करने के लिए एक और दरवाजा मिलने की उम्मीद है। दौरा कई मायनों में दोनों देशों के लिए अहम है।
मिस्र का है रसूख बढ़ाने का लक्ष्य
कारोबार में मजबूती चाहता है भारत
अफ्रीकी देश में 50 भारतीय कंपनियां
लुधियाना स्थित इंजीनियरिंग निर्यातक व हैंड टूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एससी रल्हन का सुझाव है कि मिस्र को भारत के साथ घरेलू मुद्रा में व्यापार शुरू करने पर विचार करना चाहिए। मिस्र में फिलहाल लगभग 50 भारतीय कंपनियां काम कर रही हैं।
भारत से बढ़ा निर्यात
भारत का मिस्र में निर्यात 2021-22 में 3.74 अरब डॉलर था, जो 2022-23 के दौरान बढ़कर 4.1 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। लेकिन, वहां से आयात 2021-22 में 3.5 अरब डॉलर से घटकर करीब 2 अरब डॉलर रह गया।
इनका होता है आयात और निर्यात
भारत मिस्र से उर्वरक, कच्चा तेल, रसायन, कच्चा कपास और कच्ची खालों का आयात करता है वहीं, गेहूं, चावल, सूती धागा, पेट्रोलियम, मांस, फ्लैट-रोल्ड उत्पाद, फेरोलॉयल (लोहे से संबंधित) और हल्के वाहन का निर्यात करता है।
बतौर पीएम नरेंद्र मोदी का पहला मिस्र दौरा
बता दें कि बतौर पीएम यह नरेंद्र मोदी का पहला मिस्र दौरा है। 1997 के बाद पहली बार कोई भारतीय पीएम यहां आए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची के अनुसार, पीएम मोदी पारस्परिक दौरे पर मिस्र गए हैं ताकि न केवल दोनों देशों के बढ़ते रिश्तों की गति बनी रहे, बल्कि उन्हें ऐसी उम्मीद और विश्वास है कि ये रिश्ते अब कारोबार और आर्थिक संबंधों के नए क्षेत्रों में भी आगे बढ़ेंगे।