अबतक 15.82 करोड़ की 328 परियोजनाओं की हो चुकी समीक्षा
ये परियोजनाएं 13 राज्यों- छत्तीसगढ़, पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, असम, गुजरात, महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश से संबंधित हैं। प्रगति बैठकों में अब तक करीब 15.82 लाख करोड़ की 328 परियोजनाओं की समीक्षा की जा चुकी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम गतिशक्ति पोर्टल का उपयोग करने की दी सलाह
प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रालयों और राज्य सरकारों को बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की योजना बनाने के लिए पीएम गतिशक्ति पोर्टल का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने परियोजनाओं के समय पर पूरा करने के लिए भूमि अधिग्रहण, उपयोगिता स्थानांतरण और अन्य मुद्दों के जल्द समाधान पर जोर दिया। उन्होंने केंद्र सरकार के मंत्रालयों और राज्य सरकारों के बीच उचित समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
मानसून से पहले मिशन 'अमृत सरोवर' का काम पूरा करने को कहा
पीएम मोदी ने 'मिशन अमृत सरोवर' की भी समीक्षा की। उन्होंने ड्रोन के माध्यम से किशनगंज, बिहार और बोटाड, गुजरात में अमृत सरोवर स्थलों के वास्तविक समय का जायजा लिया। प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों और राज्य सरकारों को मानसून आने से पहले मिशन मोड में 'अमृत सरोवर' का काम पूरा करने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने योजना के तहत 50,000 अमृत सरोवर के लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए ब्लॉक स्तर की निगरानी पर भी जोर दिया।
पर्यावरण संरक्षण भारत की प्रतिबद्धता, मजबूरी नहीं
प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण भारत के लिए कोई मजबूरी नहीं बल्कि प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि विकास और प्रकृति एक साथ कदमताल कर सकते हैं। उन्होंने 'द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट' (टेरी) की ओर से आयोजित विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (डब्ल्यूएसडीएस) में एक संदेश के जरिए कहा कि भारत ऊर्जा के नवीकरणीय और वैकल्पिक स्रोतों से अपनी बिजली की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा कि देश नवीनतम प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से विभिन्न शहरी चुनौतियों, विशेष रूप से प्रदूषण और स्वच्छता से संबंधित चुनौतियों का समाधान तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा, हम पृथ्वी को मां के रूप में पूजते हैं। हमारे शास्त्र कहते हैं कि पृथ्वी हमारी मां है और हम उसके बच्चे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सार्वभौमिक भाईचारे की भावना ने लगातार राष्ट्र और उसके लोगों का मार्गदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने की ऐसी गौरवशाली संस्कृति और उत्कृष्ट परंपराओं के दर्शन के साथ, भारत के लिए पर्यावरण संरक्षण के वास्ते वैश्विक प्रयासों में सबसे आगे रहना स्वाभाविक है।