उनकी इस अनूठी सेवा के लिए उन्हें 2017 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। वक्त पर इलाज नहीं मिलने की वजह से 1995 में हक की मां का हार्ट अटैक से निधन हो गया था
पद्मश्री से सम्मानित बाइक एंबुलेंस दादा के नाम से मशहूर करिमुल हक शनिवार को बागडोगरा हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री से मिले। करिमुल हक को उनकी नि:स्वार्थ सेवा के लिए जाना जाता है।
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हक चाय बागान में काम करते हैं। वे बाइक पर बैठाकर लोगों को आस पास के क्षेत्रों में इलाज के लिए लेकर जाते हैं। उनकी इस अनूठी सेवा के लिए उन्हें 2017 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। वक्त पर इलाज नहीं मिलने की वजह से 1995 में हक की मां का हार्ट अटैक से निधन हो गया था।
उसके बाद से ही हक ने फैसला किया कि एंबुलेंस की कमी के कारण किसी मरीज को अस्पताल तक पहुंचने में दिक्कत न हो इसलिए बाइक एंबुलेंस की शुरुआत की। 1998 से हक करीब 20 गांवों में अपनी सेवा दे रहे हैं। डुआर्स क्षेत्र में ढांचागत सुविधाओं का जबर्दस्त अभाव है। यहां पानी, बिजली और सड़क की सुविधाओं के लिए भी लोग जूझ रहे हैं।
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इसके अलावा सबसे नजदीकी अस्पताल भी गांव से 45 किलोमीटर दूर है। बता दें, इससे पहले हुगली में आयोजित एक जनसभा के दौरान भी प्रधानमंत्री ने अल्पसंख्यक समुदाय के एक मतदाता को पास आकर अपनी बात कहने की इजाजत दी थी। उसने पीएम की कान में कुछ कहा, जिसे उन्होंने बड़े गौर से सुना था।