पीएम मोदी ने उनसे पूछा कि वह अपने परिवार को यह मनाने में कैसे सफल हुईं कि वह कोरोना के मरीजों की देखभाल करने जा रही हैं। उन्होंने पूछा कि जब आप अस्पताल के लिए निकलती हैं तो आपके परिवार के सदस्यों को चिंता तो होती होगी।
इस पर सिस्टर छाया ने कहा जी सर, चिंता तो होती है, लेकिन देश जिस दौर से गुजर रहा है उसमें हमारा काम पहले जरूरी है। हमें लोगों की मदद के लिए आगे आना ही होगा। मेरा परिवार समझता है कि मेरी जरूरत पहले क्या है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सिस्टर से पूछा कि मरीज के परिवार वाले नाराजगी जाहिर करते होंगे तो उन्होंने कहा, हम मरीजों के परिवार वालों को अंदर नहीं आने देते हैं। प्रधानमंत्री ने पूछा कि देशभर में काम करने वाली महिला और पुरुष नर्सों के लिए सिस्टर छाया का क्या संदेश है तो सिस्टर छाया ने कहा-डरने का नहीं, काम करने का। यह समय कोरोना जैसी बीमारी को भगाने का है और देश को जिताने का है।
वुहान से लौटे कश्मीरी छात्र से पीएम ने की बात
प्रधानमंत्री ने चीन के वुहान से लौटे 60 कश्मीरी छात्रों में से एक छात्र निजामुर रहमान से बात की। वुहान से लौटे सभी छात्र वहां एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे। निजामुर कश्मीर के कसकूट बनिहाल के रहने वाले हैं। रहमान ने पीएम को बताया कि वुहान में स्थिति भयंकर है।
रहमान ने पीएम का शुक्रिया करते हुए कहा कि समय रहते उनको और उनके मित्रों को वुहान शहर से सुरक्षित निकाल लिया गया। जब पीएम मोदी ने रहमान से अपना अनुभव साझा करने को कहा कि तो निजाम ने बताया कि 14 दिन अलग थलग रहने के दौरान उन्हें कोई समस्या नही हुई, उन्हें अच्छा खाना दिया गया, खेलने को गेम्स दिए गए। इसलिए जो लोग क्वारंटीन के दौरान रहते हैं वे न डरें।
पीएम ने शनिवार को आयुष पेशेवरों से भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से चर्चा की। प्रधानमंत्री ने आयुष दवा निर्माताओं को अपने संसाधनों का उपयोग कर सैनिटाइजर जैसी आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन का सुझाव दिया। साथ ही टेलीमेडिसिन के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर महामारी से लड़ने के लिए जागरूकता फैलाने के लिए कहा है।
उन्होंने कहा, इस महामारी की चुनौती से निपटने के लिए देश को सारे स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों का उपयोग करने के लिए तैयार रहना चाहिए। सरकार जरूरत पड़ने पर आयुष से जुड़े निजी डॉक्टरों से भी मदद लेगी।