प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने मंगलवार को फोन पर बातचीत की। जानकारी के अनुसार इस दौरान दोनों नेताओं के बीच हिंद प्रशांत क्षेत्र को लेकर बातचीत की। इसके अलावा दोनों के बीच अफगानिस्तान में हालात को लेकर भी चर्चा हुई। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ने फ्रांस के साथ चार हजार करोड़ डॉलर के पनडुब्बी के सौदे को रद्द कर दिया है।
इमैनुअल मैक्रों का आया जवाब
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्वीट किया कि नमस्ते, प्रिय साथी, प्रिय मित्र, हमारी रणनीतिक साझेदारी के महत्व की पुष्टि करने के लिए धन्यवाद। भारत और फ्रांस भारत-प्रशांत को सहयोग और साझा मूल्यों का क्षेत्र बनाने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध हैं। हम इस पर निर्माण करना जारी रखेंगे।
वहीं, विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर द्विपक्षीय बैठकों की एक श्रृंखला शुरू करने वाले हैं। इसकी शुरुआत आज न्यूयॉर्क में फ्रांस के विदेश मंत्री के साथ बैठक के साथ होगी।
उल्लेखनीय है कि ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम (यूके) ने हाल ही में 'ऑकस' नामक एक त्रिपक्षीय रक्षा गठबंधन किया है। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया को परमाणु ऊर्जा से पनडुब्बी बनाने की तकनीक दी जाएगी। जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने फ्रांस के साथ चार हजार करोड़ डॉलर के सौदे से हाथ पीछे खींच लिए और अब इसे लेकर फ्रांस खासा नाराज है।
बता दें कि चीन का मुकाबला करने के लिए यह गठबंधन हुआ है जबकि पहले से ही 'क्वाड' नामक एक संगठन मौजूद है। भारत 'क्वाड' का हिस्सा है लेकिन 'ऑकस' का नहीं। 'क्वाड' में भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान शामिल हैं। विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने भी साफ किया है कि दोनों संगठनों के उद्देश्य अलग हैं और 'ऑकस' का 'क्वाड' पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
अफगानिस्तान में हालात को लेकर जताई चिंता
इस टेलीफोन वार्ता को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया कि मैक्रों और पीएम मोदी ने अफगानिस्तान में हालात को लेकर चिंता जताई। इसने कहा कि अफगानिस्तान की सत्ता मे मौजूद अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के साथ अपने संबंध समाप्त करने चाहिए, मानवीय संगठनों को कार्य करने की अनुमति देनी चाहिए और अफगान महिलाओं के मौलिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
वैक्सीन पर भारत के फैसले का किया स्वागत
मैक्रों के कार्यालय ने कहा कि राष्ट्रपति ने भारत के कोवाक्स पहल के तहत टीका आपूर्ति को फिर से बहाल करने के फैसले का स्वागत किया। इसने कहा कि दोनों देश आने वाले कार्यक्रमों के समन्वय के लिए लगातार संपर्क में रहेंगे और चर्चाएं करते रहेंगे। इसमें खास तौर पर जी20 और जलवायु परिवर्तन पर कॉप26 सम्मेलन शामिल है। दोनों देश कोरोना महामारी के खिलाफ संयुक्त प्रयास भी जारी रखेंगे।