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Covishield: 'वैक्सीन के दुष्प्रभावों की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति बने', सुप्रीम कोर्ट में दिया गया आवेदन

Wed, 01 May 2024 06:27 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Covishield: एस्ट्राजेनेका ने थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम के साथ वैक्सीन और थ्रोम्बोसिस के बीच एक संबंध को स्वीकार कर लिया है। यह एक चिकित्सकीय स्थिति है जिसमें प्लेटलेट्स के असामान्य रूप से निम्न स्तर पर पहुंच जाते हैं और खून के थक्के बनते हैं।
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Supreme Court - फोटो : ANI
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विस्तार
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कोविशील्ड टीके के किसी भी संभावित दुष्प्रभाव और जोखिम के कारणों की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग करते हुए बुधवार को उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गई। याचिका के अनुसार ब्रिटेन स्थित दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने कहा है कि कोविड-19 से बचाव के लिए उसका टीका (जिसे भारत में लाइसेंस के तहत कोविशील्ड के रूप में बनाया गया था) के कारण "बहुत दुर्लभ" मामलों में प्लेटलेट काउंट कम हो सकता है और खून के थक्के बन सकते हैं।

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अधिवक्ता विशाल तिवारी की ओर से दायर आवेदन में केंद्र को उन लोगों को मुआवजा देने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है जो कोविड के दौरान उन्हें दिए गए टीके के किसी भी दुष्प्रभाव से गंभीर रूप से विकलांग हो गए या जिनकी मौत हो गई। 

एस्ट्राजेनेका ने थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम के साथ वैक्सीन और थ्रोम्बोसिस के बीच एक संबंध को स्वीकार कर लिया है। यह एक चिकित्सकीय स्थिति है जिसमें प्लेटलेट्स के असामान्य रूप से निम्न स्तर पर पहुंच जाते हैं और खून के थक्के बनते हैं। 
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याचिका में कहा गया है, ''कोविड-19 के बाद दिल का दौरा पड़ने और अचानक लोगों के गिरने से मौत के मामले बढ़े हैं। युवाओं में भी दिल का दौरा पड़ने के कई मामले सामने आए हैं। अब, कोविशील्ड के डेवलपर द्वारा ब्रिटेन की अदालत में दायर दस्तावेज के बाद, हम कोविशील्ड वैक्सीन के जोखिम और खतरनाक परिणामों के बारे में सोचने के लिए मजबूर हैं, ये टीके बड़ी संख्या में नागरिकों को दिए गए हैं।"

पीठ ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए सरकार को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है और इस मुद्दे को केंद्र द्वारा प्राथमिकता पर देखा जाना चाहिए ताकि भविष्य में भारतीय नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा कोई जोखिम न हो। 

आवेदन में कहा गया है कि एस्ट्राजेनेका के वैक्सीन फॉर्मूले का लाइसेंस पुणे स्थित वैक्सीन निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) को दिया गया था और देश में कोविशील्ड की 175 करोड़ से अधिक खुराक दी गई हैं।

याचिकाकर्ता ने कहा कि सुरक्षा से जुड़े सरकार के आश्वासन पर नागरिकों को बड़ी संख्या में कोविशील्ड की खुराकें दी गईं। आवेदन में कहा गया है कि ब्रिटेन जैसे कुछ देशों में टीकाकरण के कारण गंभीर रूप से अक्षम होने वाले लोगों के लिए 'वैक्सीन क्षति भुगतान प्रणाली' है।

याचिका में कोविशील्ड टीके के दुष्प्रभावों और इसके जोखिम के कारणों की जांच के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली के विशेषज्ञों का एक चिकित्सा विशेषज्ञ पैनल गठित करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है। याचिका में कहा गया है कि पैनल की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक करें और शीर्ष अदालत के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश इसकी निगरानी करें।

याचिका में कोविड-19 के दौरान टीकाकरण अभियान के परिणामस्वरूप गंभीर रूप से अक्षम हुए नागरिकों के लिए 'वैक्सीन क्षति भुगतान प्रणाली' स्थापित करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की भी मांग की गई है। यह आवेदन तिवारी द्वारा दायर 2021 की लंबित याचिका में दायर किया गया है, जिसमें कथित नकली टीकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

ब्रिटेन की मीडिया में अदालत के दस्तावेजों के हवाले से दावा किया गया है कि एस्ट्राजेनेका ने यह स्वीकार किया है कि 'बहुत दुर्लभ मामलों' में उनकी कोविड वैक्सीन, जिसे यूरोप में वैक्सजेवरिया और भारत में कोविशील्ड के नाम से जाना जाता है, रक्त के थक्के जमने से संबंधित दुष्प्रभाव पैदा कर सकती है, लेकिन इसका कारण अज्ञात है।

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