प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशर संजय कुमार मिश्रा को दिए गए सेवा विस्तार को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता साकेत गोखले की ओर से दाखिल की गई इस याचिका में तर्क दिया गया है कि ईडी निदेशक को दिया गया सेवा विस्तार केंद्रीय विजिलेंस आयोग अधिनियम की धारा 25 के तहत अवैध है और यह सितंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी किए गए आदेश का गंभीर उल्लंघन है।
याचिका में कहा गया है कि मिश्रा ने अपनी साल 2018, 2019 और 2020 में अपनी सालाना अचल संपत्ति रिटर्न समय से अपलोड नहीं किया है। गोखले ने एक कार्यालय आदेश का उल्लेख किया है जिसके अनुसार सभी सिविल सेवकों के लिए उनकी अचल संपत्ति का रिटर्न अपलोड करना आवश्यक है। याचिका में कहा गया कि यह और भी आश्चर्य की बात है कि मिश्रा को दूसरी बार कार्यकाल विस्तार दिया गया है, जबकि इसके विपरीत उक्त कार्यालय आदेश का पालन करने में विफलता के लिए विभागीय जांच के माध्यम से उनके खिलाफ कार्यवाही की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने आठ सितंबर 2021 के अपने आदेश में ईडी के निदेशक के तौर पर मिश्रा के कार्यकाल में विस्तार करने के लिए केंद्र की शक्ति को बरकरार रखा था। लेकिन, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि सेवानिवृत्ति की आयु में पहुंचने के बाद अधिकारियों के कार्यकाल में विस्तार केवल अपवाद के मामलों में की किया जाना चाहिए। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में यह भी साफ-साफ कहा था कि संजय कुमार मिश्रा को और अधिक कार्यकाल विस्तान नहीं दिया जा सकता है।
बैंक ऋण धोखाधड़ी मामला : आईपीएस समेत अन्य के खिलाफ केंद्र, सीवीसी और सीबीआई को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों रुपये के बैंक ऋण धोखाधड़ी और एक व्हिसलब्लोअर की मौत के मामले में उत्तराखंड के एक आईपीएस अधिकारी और अन्य के खिलाफ समयबद्ध जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र, केंद्रीय सतर्कता आयोग और सीबीआई से जवाब मांगा है। प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिवक्ता राज किशोर चौधरी की दलीलों पर गौर किया और सरकार और जांच एजेंसियों को नोटिस जारी किया।
जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि जिन लोगों के खिलाफ याचिका में आरोप लगाए गए थे, उन्हें पक्ष नहीं बनाया गया था। उन्होंने पूछा, आपने ऐसे गंभीर आरोप लगाए हैं...आपने उन लोगों को क्यों नहीं जोड़ा जिनके खिलाफ आपने आरोप लगाए हैं।