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पुराना खतरों का खिलाड़ी है मिग-21(बाइसन)

Mon, 04 Mar 2019 11:11 PM IST
संदीप भट्ट शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मिग-21 विमान - फोटो : File Photo
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एयरस्ट्राइक बालाकोट-2019 के बाद अगले दिन सुबह विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान मिग-21, बाइसन पर थे। विंग कमांडर ने इसी विमान से अमेरिका के चौथी पीढ़ी के बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान एफ-16 को उड़ा दिया था। इसके बाद विंग कमांडर का मिग-21 भी आपरेशन को आगे अंजाम देने के काबिल नहीं रहा और कमांडर को अपने कॉकपिट से बाहर आना पड़ा। तब से मिग-21 बाइसन को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि मिग-21 बाइसन खतरों का पुराना खिलाड़ी है। वायुसेना के इस पर हाथ साफ कर चुके फाइटर पायलट आज भी इससे काफी प्रेम करते हैं।

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वायुसेनाध्यक्ष एयरचीफ मार्शल बीएस धनोवा भी मिग-21 उड़ा चुके हैं। जगुआर, मिग-29, सुखोई-30 एमकेआई फाइटरजेटों को उड़ा चुके और एक अच्छे फाइटरजेट प्रशिक्षक रहे धनोवा को भी मिग-21 पर नॉज है। वायुसेना के मिग-21 बाइसन को उड़ा चुके फाइटर पायलट बताते हैं कि खतरों का यह खिलाड़ी अपग्रेड होने के बाद काफी खतरनाक हो चुका है। भारतीय वायुसेना के एक एयरवाइस मार्शल का कहनाहै कि मिग-21 बाइसन अब करीब चौथी पीढ़ी का फाइटर जेट है। यह काफी घातक है और वायुसेना ने इसके अपग्रेडेशन का निर्णय लेकर कोई गलती नहीं की है।


मिकोयान गुरेविच, मिग-21 बाइसन

मिग-21 बाइसन को नौसिखिया फाइटर पायलट आसानी से कंट्रोल नहीं कर सकता। कारण साफ है। यह 225 मीटर प्रति सेकेंड(करीब250 किमी प्रतिघंटा) की रफ्तार से उड़ान भरता है तो 350 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से जमीन पर उतरता है। खासियत यह है कि विमान को महज दो मिनट के भीतर किसी भी हवाई आपरेशन के लिए तत्काल लांच किया जा सकता है। पेंसल जैसा आकार, पतला, सिलेंड्रिकल का दिखने वाला यह फाइटर जेट(रूसी भाषा में उनके वाद्ययंत्र आलोवेक जैसा दिखने के कारण इसे बलालैका कहा जाता था) अपने लक्ष्य को ढूंढने, उसे तेजी से हमले में ध्वस्त करने और उतनी ही फुर्ती से वापस अपने अड्डे की तरफ लौट आने में माहिर है। 2006 में वायुसेन ने 110 मिग-21 के अपग्रेडेशन की प्रक्रिया शुरू की और तब 1960 के दशक का यह सोवियत रूस के जमाने फाइटर जेट अधिक घातक हो गया है।
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क्या है खासियत

मिग-21 ने पहली उड़ान 1955 में भरी। 1959 में यह सोवियत रूस की सेना में शामिल हुआ। 1990 तक सिंग इंजन, सिंगल पायलट के सहारे उड़ान भरने वाले इस फाइटरजेट ने अपनी सेवाएं दी। भारतीय वायुसेना में अभी मिग -21 सिरीज के विमान फेज-आऊट हो रहे हैं। इसी क्रम में जिन मिग-21 विमानों की स्थिति अच्छी थी, वायुसेना ने उन्हें मल्टीरोल रेडार, हाई क्वालिटी की एवियानिक्स, इलेक्र्टानिक उपकरण, मल्टीरोल संचार प्रणाली, रेडार से अपग्रेड करके 20 साल तक और सेवाएं लेने में सक्षम बनाया है। 

इन्हें मिग-21 बाइसन कहा जाता है। मिग-21 बाइसन में  हेलमेट माऊंट साइट, यानी अत्याधुनिक कॉकपिट है। आर-73और आर-77 मध्यम दूरी की मिसाइल से दुश्मन के वार, दुश्मन के फाइटर जेट और हवा से हवा में या हवा से जमीन पर मार करने में सक्षम है। यह किसी भी अत्याधुनिक लड़ाकू विमान की तरह मिसाइल, हथियार ले जाने में सक्षम है।

 इसके बाई तरफ दुश्मन पर निशाना साधने के लिए गन है और 450 राऊंड गोलियों की बरसात कर सकता है। मिग-21 बाइसन की मारक क्षमता करीब 1470 किमी है।  इसमें उन्नत सर्च रेडार, ट्रैकिंग सिस्टम लगा है और यह प्रणाली आसानी से रेडार नियंत्रित मिसाइल को संचालित करती है। जैमर्स और प्रतिरोधी क्षमता से लैस है। मिग-21 बाइसन की स्पीड भी कोई 2250 किमी प्रतिघंटा है। यह दुश्मन के रेडार की आंखों में धूल झोकने में सक्षम है।

 वायुसेना बनाती है एयर फार्मेशन

सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, जगुआर और मिग-21 भारतीय वायुसेना के मारक फाइटरजेट हैं। मिग-29 प्रतिरक्षी फाइटर जेट है। वायुसेना अपने इन आपरेशनल फाइटर जेटों के सहारे शानदार एयरफार्मेशन बनाती है। भारतीय वायुसेना की इस मारक क्षमता के सामने पाकिस्तान की वायुसेना के पास बहुत ही सीमित विकल्प होते हैं। वायुसेना के उच्चपदस्थ सूत्रों की माने तो सरकार ने जितनी लक्ष्मण रेखा तय की थी, भारतीय वायुसेना ने आपरेशन बालाकोट और उसके बाद शानदार मारक एवं बचाव क्षमता का उदाहरण दिया है।

 वायुसेना सूत्रों के अनुसार इसके कारण ही पाकिस्तानी वायुसेना को रक्षात्मक हो जाना पड़ा। एक विंग कमांडर के अनुसार 27 फरवरी को पाकिस्तान की वायुसेना फाइटरजेट किसी बड़ी जवाबी कार्रवाई की मंशा से नापाक इरादे लेकर आए थे, लेकिन मिग, मिराज, सुखोई की तिकड़ी ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया।
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