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सुनियोजित हमले पर नक्सलियों ने फिर दिया संगठित होने का सिग्नल

Wed, 14 Mar 2018 11:02 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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करीब एक साल से शांत बैठे नक्सलियों का छत्तीसगढ़ के सुखमा में हुआ बड़ा नक्सली हमला आने वाले दिनों के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा है। खुफिया एजेंसियां कुछ महीनों से सरकार को यह ताकीद कर रही थी कि अर्धसैनिक बलों के चौकियों के जाल बिछाने के बावजूद भी जंगलों में नक्सली बड़े पैमाने पर संगठित हो रहे हैं। मंगलवार को सुखमा के किस्ताराम में सुनियोजित तरीके से एंटी माइन्स व्हैकिल (एएमवी) को उड़ाकर गोलियों से हमला उसी का नतीजा माना जा रहा है। इस हमले में करीब 100 नक्सली शामिल थे।

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गृह मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा विभाग से जुड़े अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि इस घटना में जिस एएमवी पर हमला हुआ वह 50 किलों के विस्फोट को सह सकता था। हमले की शुरुआती समीक्षा के मुताबिक इसमें नक्सलियों ने कम से कम 75 किलो बारूद का इस्तेमाल किया होगा। माइन्स से बचने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में बड़ी रोधक ताकत वाले ऐसे नए वाहन का इस्तेमाल शुरु किया है। अर्धसैनिक बलों के पास अब तक ऐसे वाहन थे जो 10 किलो के विस्फोट ही सह सकते थे। नक्सली 15 से 25 किलो का इस्तेमाल कर उसे उड़ा देते थे। सूत्रों के मुताबिक एक हमले के लिए 75 किलो बारुद का इस्तेमाल करना बहुत बड़ी बात है।

सूत्रों के मुताबिक नक्सलियों के संगठित होने का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि इस हमले के करीब चार घंटे पहले सुबह 8 बजे किस्ताराम से कुछ दूरी पर ही नक्सलियों ने सीआरपीएफ के 208 कोब्रा बटालियन पर हमला बोला था। लेकिन इसमें कोब्रा से समय रहते मिले जवाबी हमले से नक्सली भाग गए। इस घटना के बाद दिन के 12.30 बजे उसी इलाके में इतनी बड़ी मात्रा में माइन्स लगाकर 212 बटालियन नौ जवानों की हत्या कर दी। सूत्रों के मुताबिक नक्सलियों को सीआरपीएफ को दोनों मूवमेंट के बारे में सटीक जानकारी थी। 
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सूत्रों के ने कहा कि यह अच्छा संकेत नहीं है और अंदेशा है कि आने वाले महीनों में नक्सली और भी बड़े हमले करेंगे। नक्सलियों ने पिछले साल अप्रैल में बड़ा हमला किया था। इस हमले में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हुए थे। इस हमले के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सीआरपीएफ के महानिदेशक से बातचीत कर उन्हें फौरन छत्तीसगढ़ जाने का आदेश दिया। महानिदेशक राजीव राय भटनागर इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट गृहमंत्री को देंगे। उधर गृह मंत्रालय में भी इस हमले की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय गोपनीय बैठक हुई।

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