भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख के बाद अब पूर्वोत्तर में भी एलएसी पर चीन की आक्रामकता का करारा जवाब देने की तैयारी कर ली है। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर किसी भी खतरे से निपटने के लिए चीन की सीमा के पास फॉरवर्ड पोजिशन पर पिनाक और स्मर्च मल्टीपल राकेट लांचर सिस्टम को तैनात किया है। हाल ही में सेना ने अरुणाचल प्रदेश में एलएसी पर अपनी तैनाती बढ़ाई थी।
38 किलोमीटर तक के इलाके में मारक
पिनाक हथियार प्रणाली एक राकेट आर्टिलरी सिस्टम है जो 38 किलोमीटर तक के इलाके में दुश्मन को निशाना बना सकती है। ऊंचाई वाले सीमाई क्षेत्र में इसकी तैनाती का मकसद सेना की क्षमताओं को मजबूत करना है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक पिनाक के छह लांचरों की एक बैटरी 44 सेकंड में 72 राकेटों का सैल्वो फायर कर सकती है। ये 1000 x 800 मीटर के दायरे में दुश्मन के टैंकों और दूसरे हथियारों को बर्बाद कर सकता है।
ऊंचाई पर अधिक कारगर
इस हथियार प्रणाली की तैनाती पर बैटरी कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल सरथ ने एएनआई को बताया कि पिनाक हथियार प्रणाली रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा डिजाइन किया गया स्वदेशी मल्टी राकेट लॉन्चर सिस्टम है। यह अत्याधुनिक और पूरी तरह से स्वायत्त हथियार प्रणाली है। यह समुद्र तल से 38 किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेद सकती है। ऊंचाई पर इसकी मारक क्षमता और कारगर हो जाती है। इसकी तैनाती से सेना की स्ट्राइक क्षमता में काफी बढ़ोतरी हुई है।
एक नजर में पिनाक
1986 में शुरू किया गया था सिस्टम का निर्माण
214 मिमी बैरल वाले 12 रॉकेट से लैस है सिस्टम
250 किलोग्राम होता है इसके हर वारहेड का वजन
80 किमी/घंटा की गति से करता है लक्ष्य पर हमला
40 किलोमीटर है पिनाक मार्क-1 संस्करण की मारक दूरी
65 किलोमीटर थी पिनाक मार्क-2 की शुरुआती मारक दूरी
70 किलोमीटर किया गया था इसे बढ़ाकर मई, 2018 में
75 किलोमीटर हो गई है नए नेविगेशन के बाद इसकी मारक दूरी
120 किलोमीटर मारक दूरी वाले पिनाक मार्क-3 का विकास जारी