आयुष मंत्रालय को देश की सभी परंपरागत स्वास्थ्य प्रणालियों पर समान रूप से ध्यान केंद्रित करने का निर्देश देने की मांग वाली एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया कि आयुर्वेद का अत्यधिक व्यवसायीकरण होने से नेचुरोपैथी और एक्यूप्रेशर जैसी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों पर लोगों का ध्यान ही नहीं जाता।
वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने इस याचिका में दलील दी कि आजकल विभिन्न रसायनों से तैयार उत्पादों को भी आयुर्वेद का ठप्पा लगाकर बाजार में उतारा जा रहा है। त्रिपाठी ने कोर्ट से सरकार को आयुर्वेद के उत्पादों के लिए मानक स्थापित करने का निर्देश देने की मांग की है। याचिका में आयुष मंत्रालय का बजट बढ़ाने का निर्देश देने, ध्यान एवं षट्कर्म की अलग शाखाएं खोलने व आयुष अनुसंधान संस्थान खोलने का निर्देश देने की मांग की।
जनता को दें नेति व आहार उपचार विज्ञान की जानकारी
याचिका में केंद्र, राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों को आयुर्वेद के नेति एवं आहार उपचार विज्ञान के बारे में जनता को पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका पालन करें और स्वस्थ भारत की ओर बढ़ें।
योग, नेचुरोपैथी के लिए अलग चैनल, सोशल मीडिया प्लेटफार्म की भी मांग
याचिका में सरकार को योग, ध्यान व नेचुरोपैथी के लिए एक अलग आयुष टीवी चैनल और विशेष सोशल मीडिया प्लेटफार्म शुरू करने का निर्देश देने की भी मांग की गई। इससे ज्यादा से ज्यादा लोग इसके महत्व को समझ सकेंगे।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मिलेगी मदद
याचिका में दलील दी गई कि भारत के प्राचीन चिकित्सा तंत्र में कोरोना जैसी महामारी से निपटने की क्षमता है। इनकी मदद से कोरोना की तीसरी लहर से जंग आसान होगी। योग, नेचुरोपैथी ध्यान और षट्कर्म की मदद से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।