भारतीय वायुसेना (आईएएफ) कबूतरों की वजह से अपने लड़ाकू विमानों की बचाव और सुरक्षा को लेकर चिंतित है। कारण यह है कि अंबाला स्थिति वायुसेना के मुख्य एयरबेस के आसपास कबूतरों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो भविष्य में राफेल लड़ाकू विमान की मुख्य ठिकाना होगा।
समाचार एजेंसी एएनआई ने आईएएफ के एक सूत्र के हवाले से कहा, "हाल के दिनों में कुछ स्थानीय लोग अपने घरों में कबूतर पाल रहे हैं। ये घर आईएएफ हवाईपट्टी के बहुत करीब हैं। इन पक्षियों की वजह से हमारे लड़ाकू विमानों को खतरा है।"
आईएएफ अधिकारियों ने स्थानीय प्रशासन से इस बारे में शिकायत दर्ज कराई है क्योंकि एयरबेस के आसपास कबूतरों बहुत बढ़ गए हैं। कुछ दिनों पहले जगुआर विमान के साथ हुई घटना के दौरान, ऐसा लगा कि ये पक्षी विमान के तेज आवाज से नहीं डरते हैं और एक पक्षी सीधे विमान के इंजन से जा टकराया।
राफेल लड़ाकू विमान अंबाला एयरबेस में मई 2020 से पहुंचना शुरू हो जाएंगे और 17वें स्क्वाडर्न का हिस्सा बनेंगे। आईएएफ के अधिकारियों ने कहा कि वे कबूतर के खतरे को गंभीरता से ले रहे हैं। सेना चाहती है कि एयरबेस के आसपास के इलाके में कबूतरों को पालने की इजाजत नहीं होनी चाहिए क्योंकि इनसे गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
पिछले हफ्ते भारतीय वायुसेना का जगुआर लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बचा। उड़ान के कुछ समय बाद विमान से एक पक्षी टकरा गया। जिससे विमान का एक इंजन फेल हो गया।
पायलट ने सूझबूझ का परिचय देते हुए विमान में लगे हुए अतिरिक्त फ्यूल टैंक और ट्रेनिंग बम को नीचे गिरा दिया। जिसके बाद विमान की अंबाला एयरफोर्स बेस पर सुरक्षित लैंडिंग हो गई। विमान से गिराए गए फ्यूल टैंक और ट्रेनिंग बम को बरामद कर लिया गया है।