पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की ओर से बुधवार को पहले मीडिया शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। इसमें मीडिया जगत के कई दिग्गज मौजूद हैं। दिल्ली में हो रहे इस शिखर सम्मेलन में भारतीय भाषाओं के अखबारों के विस्तार और तकनीक के बढ़ते दखल पर दिग्गजों ने अपने विचार रखे।
इस दौरान सभी ने यह माना कि आज भी अखबार सबसे विश्वसनीय समाचार माध्यम है। यही वजह है कि डिजिटल और सोशल मीडिया के तेजी से विस्तार के बाद भी भारत में अखबारों की प्रसार संख्या बढ़ रही है। यह बताता है कि आज भी लोगों में अखबार का अपना महत्व है। चर्चा के दौरान मीडिया जगत के दिग्गजों ने कहा कि अखबार आज भी सबसे विश्वसनीय माध्यम हैं। पाठक दिन भर टीवी और डिजिटल मीडिया पर खबरें देखने के बाद भी अखबार पढ़ता है।
अमर उजाला के प्रबंध निदेशक तन्मय महेश्वरी ने इस मौके पर कहा, "हमारे यहां लोगों को पांच से सात रुपए में अखबार मिल जाता है। विदेशों में यही अखबार 30-40 रुपये में उपलब्ध होता है। इसमें भी लॉजिस्टिक्स लगता है। सामान्य रूप से हमारे यहां कोई सामान मंगवाने पर हर पैकेट पर 50 से 60 रुपये की लॉजिस्टिक्स लागत आती है, लेकिन हम इन सब लागतों के बाद भी केवल पांच से सात रुपये में अखबार उपलब्ध कराते हैं। हमें समझना चाहिए कि यह अंतर कहां से आ रहा है।"
'अखबार समाप्त हो जाएंगे, ये सोच बेबुनियाद'
अमर उजाला के एमडी तन्मय महेश्वरी ने कहा, "मीडिया में महिला पत्रकारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए।" एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "बाजार बढ़ रहा है। शिक्षा का स्तर और लोगों की खरीदने की क्षमता लगातार सुधर रही है। लोगों की जानने की इच्छा भी बढ़ रही है। इसके बहुत से माध्यम हो सकते हैं। इस स्थिति में अलग-अलग लोगों की रुचि और पहुंच को ध्यान में रखते हुए अखबार और डिजिटल मीडिया समेत हर प्रकार का प्लेटफॉर्म बना रहेगा और आगे बढ़ता भी रहेगा। यह चिंता बेबुनियाद है कि नए जमाने में अखबार समाप्त हो जाएंगे।"
'डिजिटल मीडिया की अपनी खूबियां और खामियां'
डिजिटल मीडिया के बारे में तन्मय महेश्वरी ने कहा, "डिजिटल मीडिया की कमाई कहां से आ रही है। यह कमाई गूगल या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से आ रही है, लेकिन इसकी अपनी खूबियां और कुछ कमियां भी होती हैं। गूगल आपके दिमाग को नई चेतना के लिए विकसित नहीं होने देता। आप जिस तरह की सामग्री लगातार ढूंढते हैं, वह आपको वही चीजें लगातार दिखाने लगता है। यह कोई गलत सूचना भी हो सकती है। डिजिटल मीडिया आपको स्वतंत्र रूप से किसी चीज को खोजने-जांचने के लिए प्रेरित नहीं करता है।"
'फैक्ट चेक की व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर'
एबीपी ग्रुप की सीईओ ध्रुबा मुखर्जी ने कहा कि हाइपरलोकल तक पहुंचना समाचार पत्रों की सबसे बड़ी ताकत है, जहां सामान्य रूप से बड़े टीवी चैनल नहीं पहुंच पाते हैं। इसी सत्र में मौजूद ईनाडू समूह के निदेशक आई वेंकट ने फैक्ट चेक पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "विश्वसनीयता हासिल करने के लिए फैक्ट चेक की व्यवस्था को मजबूत बनाने की आवश्यकता है।" इस दौरान दैनिक भास्कर समूह के निदेशक गिरीश अग्रवाल, पीएचडीसीसीआई की मीडिया एवं कम्युनीकेशन कमेटी के अध्यक्ष पवन अग्रवाल भी मौजूद रहे।
फेक न्यूज के जमाने में विश्वसनीयता सबसे बड़ी चुनौती है: विनोद अग्निहोत्री
अमर उजाला के सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री ने कहा, "पत्रकारिता सबसे लोकतांत्रिक पेशा है। यहां पत्रकार के रूप में आने वाला नया युवा अपने सबसे वरिष्ठ संपादकों के साथ विचार विमर्श करता है। सीखता है और सिखाता है। समाचार पत्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि टीवी और डिजिटल के जमाने में उसे अगले दिन सुबह भी जनता के लिए प्रासंगिक और उपयोगी बने रहना है। फेक न्यूज के जमाने में विश्वसनीयता सबसे बड़ी चुनौती है।"
दैनिक भास्कर के नेशनल एडिटर लक्ष्मी पन्त ने कहा, "निचले और छोटे इलाकों के पत्रकार आज व्यवस्था के सामने सबसे गंभीर प्रश्न उठा रहे हैं। नए लोग साक्षर हो रहे हैं। खबरों का उपभोग बढ़ रहा है। इसके प्लेटफार्म बदल रहे हैं।" आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को लेकर उन्होंने कहा, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कभी इंसान की कल्पनाशक्ति को खत्म नहीं कर सकता। लिखने का काम पत्रकार ही करेंगे। AI उसे बेहतर रूप से दिखाने में मदद कर सकता है।"
सत्र के सूत्रधार एनडीटीवी के सलाहकार संपादक और वरिष्ठ एंकर सुमित अवस्थी ने कहा, “लिखने का काम पत्रकार ही करेंगे। यह नितांत कल्पनाशीलता और रचनाधर्मिता का क्षेत्र है जिसकी कोई मशीन या तकनीकी तुलना नहीं कर सकती।” वहीं, हिन्दुस्तान समूह के प्रबंध संपादक प्रताप सोमवंशी ने कहा कि इसे सीखकर अपना काम बेहतर बनाने की कोशिश की जानी चाहिए। AI समाचार को बेहतर रूप से दिखाने में मदद कर सकता है।
टाइम्स ऑफ इंडिया समूह के कौशत्व चटर्जी ने कहा कि नए समय में मीडिया क्षेत्र के लिए भी परिस्थितियों में तेजी से बदलाव आ रहा है। स्मिता झा ने कहा कि जब देश का सकल घरेलू उत्पादन बढ़ता है और अर्थव्यवस्था बेहतर होती है तो इसका प्रभाव मीडिया संस्थानों को मिलने वाले प्रचार पर भी पड़ता है।