केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने शनिवार को इस बात पर अफसोस जताया कि भारत बड़े पैमाने पर दुनिया को जेनेरिक दवाएं मुहैया करा रहा है, लेकिन देश में ब्रांडेड दवाओं का ही सेवन ज्यादा हो रहा है। उन्होंने कहा कि ब्रांडेड दवाओं के कारण इलाज का खर्च बढ़ रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार दवा क्षेत्र में पेंटेट किए गए ड्रग्स पर शोध को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। जेनेरिक दवाओं का इस्तेमाल बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। 'वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट' के 10 वें आयोजन में फार्मा क्षेत्र पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंडाविया ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि देश के 10 करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने की सरकार की नीति भी दवा उद्योग के लिए अवसर प्रदान करती है।
पेटेंट वाली दवाओं को विश्व बाजार में बेचें
सरकार ने फार्मा क्षेत्र में शोध की नीति का आसान बनाया है और अनुसंधान की इजाजत के लिए किसी कंपनी को इजाजत देने में लगने वाले वक्त को भी कम कर दिया है। मंडाविया ने कहा कि देश को सिर्फ जेनेरिक दवाओं के उत्पादन तक ही सीमित नहीं रहना है, बल्कि उन्हें शोध भी करना चाहिए और पेटेंट कराकर दवाएं विश्व बाजार में बेचना चाहिए।
अमेरिका में चार में से एक जेनेरिक दवा भारत में निर्मित
मंडाविया ने बताया कि अमेरिका में ली जाने वाली चार जेनेरिक गोलियों में से एक और विश्व में छह टेबलेट में से एक भारत में निर्मित होती है। हम दुनिया को जेनेरिक दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन अफसोस है कि हम अपनी इलाज लागत बढ़ाने के लिए खुद ब्रांडेड दवा का सेवन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र की योजनाओं से देश में जेनेरिक दवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।
नौ माह में तैयार किया गया कोविड टीका
मंडाविया ने कहा कि सरकार दवा कंपनियों में अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए एक नीति पर काम कर रही है, जो यह विचार करेगी कि उन्हें वित्तीय सहायता कैसे दी जा सकती है। इससे नौ महीने के भीतर कोविड-19 टीकों के अनुसंधान और उत्पादन में मदद मिली है। स्थिति बदल रही है। हमारे वैज्ञानिकों में क्षमता थी, लेकिन सिस्टम ऐसा था कि उन्हें आवेदन के दो-तीन साल बाद शोध की इजाजत मिलती थी।भारत के पास फार्मा क्षेत्र में वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए कौशल, जनशक्ति और विश्वास है।
हेल्थ व वेलनेस सेंटर बढ़कर 90 हजार, 8500 जनौषधि केंद्र
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों की संख्या बढ़कर 90 हजार हो गई है। इनका उद्देश्य गरीबों को सस्ता इलाज मुहैया कराना है। अगले दो साल में यह 1.5 लाख हो जाएंगे। देश में 8500 से ज्यादा जनऔषधि केंद्र हैं और लोगों को अच्छी क्वालिटी की जेनेरिक दवाएं आधे दामों में मुहैया कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।