मुस्लिम संगठन बोले- देश सुरक्षित तो हम भी
कुछ मुस्लिम संगठनों और उनके नेताओं ने भी पीएफआई पर प्रतिबंध का समर्थन किया है। ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा, कानून का अनुपालन और आतंकवाद की रोकथाम के लिए अगर यह कार्रवाई की गई है तो इस पर सभी को धीरज से काम लेना चाहिए, क्योंकि अगर देश सुरक्षित है तो हम सुरक्षित हैं। ब्यूरो
- ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के दीवान सैयद जैनुल आबेदीन ने कहा, पीएफआई की देश विरोधी गतिविधियों की खबरें आ रही हैं। इस पर प्रतिबंध देश हित में है।
- ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा, भारत कट्टरपंथी विचारधारा की सरजमीं नहीं है और न यहां ऐसी कट्टरपंथी विचारधारा पनप सकती है
- मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया ने कहा, पीएफआई जिन खतरनाक मंसूबों पर काम कर रहा था, उन्हें उचित नहीं कह सकते।
- शिया धर्मगुरू मौलाना सैफ अब्बास ने रोक का स्वागत करते हुए कहा, देश में रहकर देश का विरोध करने वालों के लिए सबक जरूरी है। माहौल बिगाड़ने की इजाजत किसी को नहीं दे सकते।
विरोध भी... ओवैसी बेचैन, लालू ने कहा- आरएसएस पर भी लगे प्रतिबंध
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, अगर कुछ लोगों की गलत गतिविधि की वजह से संगठन को बैन किया जाता है तो यह खतरनाक है। उन्होंने इस फैसले को तानाशाही करार दिया है। कहा, कट्टरपंथी सोच का हम हमेशा से विरोध करते आए हैं लेकिन इस तरह का प्रतिबंध बिल्कुल गलत है। ब्यूरो
- राजद नेता लालू यादव ने कहा, पीएफआई की तरह जितने भी संगठन हैं सभी पर प्रतिबंध लगे। सबसे पहले आरएसएस को बैन करिए। यह उससे भी बदतर संगठन है।
- यूपी के संभल से सपा सांसद शफीक उर रहमान बर्क ने कहा, यह संगठन मुस्लिमों का हितैषी है, इसलिए इसके खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। पीएफआई में जो गिरफ्तारियां हुई हैं, वो भी गलत हैं।
महाराष्ट्र, कर्नाटक व मध्य प्रदेश की सरकारों ने शुरू की सख्ती
महाराष्ट्र, कर्नाटक व मध्य प्रदेश में पीएफआई पर रोक के साथ ही सख्ती शुरू हो गई है। महाराष्ट्र सरकार ने पुलिस को संगठन के कार्यालयों को सीज करने और बोर्ड हटाने के निर्देश दिए हैं। कर्नाटक के डीजीपी प्रवीण सूद ने चेतावनी दी कि पीएफआई पर प्रतिबंध के खिलाफ प्रदेश में कोई भी प्रदर्शन हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा, पुलिस व जिला अधिकारी सरकार के आदेशों के अनुसार प्रतिबंध लागू करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करेंगे। सूद ने कहा, केंद्र के प्रतिबंध के बाद, राज्य सरकार जल्द ही जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस आयुक्त को जमीनी स्तर की कार्रवाई को लेकर आदेश जारी करेगी। पुलिस सतर्क है और संगठन के कार्यकर्ताओं व उसका समर्थकों पर कड़ी नजर रख रही है।
मध्य प्रदेश पुलिस ने पीएफआई से जुड़े चार और लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रदेश पुलिस अब तक 25 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पीएफआई पर प्रतिबंध को आंतरिक सर्जिकल स्ट्राइक बताया है। वहीं, पुलिस के मुताबिक खरगोन में रामनवमी जुलूस के दौरान हिंसा भड़काने में पीएफआई का हाथ था। संगठन ने दंगा पीड़ितों की मदद के नाम पर 55 लाख रुपये का चंदा भी जुटाया था।
हवाला से जुटाते चंदा, फिर उस पैसे को करते हैं सफेद
- गृह मंत्रालय के मुताबिक, पीएफआई के सदस्य आतंकी साजिश के लिए हवाला व चंदों के रूप में विदेश से पैसे जुटाते हैं। इस रकम को अलग-अलग चैनलों के माध्यम से सफेद किया जाता है।
- पीएफआई की राजनीतिक इकाई सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया को 2018-19 से अब तक तीन साल में 11 करोड़ रुपये का चंदा मिला।
सिमी के नेताओं ने की संगठन की स्थापना, जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) से भी जुड़े हैं तार
गृहमंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया, पीएफआई के कुछ संस्थापक सदस्य प्रतिबंधित स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के नेता हैं। इस संगठन के तार जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) से भी जुड़े हैं। सिमी और जेएमबी दोनों ही भारत में प्रतिबंधित हैं।
पीएफआई के वैश्विक आतंकी संगठन आईएस से जुड़े होने के कई साक्ष्य मिले हैं। पीएफआई, उसके सहयोगी संगठन या मोर्चे देश में असुरक्षा की भावना को बढ़ावा देकर एक समुदाय के कट्टरपंथ को बढ़ाने के लिए गुप्त रूप से काम कर रहे हैं। इसकी पुष्टि इस तथ्य से होती है कि कुछ पीएफआई सदस्य अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों में भी शामिल हो गए हैं।
इन परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार की राय है कि पीएफआई और उसके सहयोगी संगठनों व फ्रंट एसोसिएशन को तत्काल प्रभाव से गैरकानूनी घोषित करना बेहद जरूरी है। इसलिए यूएपीए की धारा 3 की उपधारा (3) के प्रावधानों के तहत इसे गैरकानूनी घोषित किया गया है।
पीएफआई देश में कायम करना चाहता है आतंक का शासन
गृह मंत्रालय ने दावा किया कि पीएफआई और उसके सहयोगी या मोर्चे देश में आतंक का शासन बनाने के इरादे से हिंसक आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हैं। वह राष्ट्र विरोधी भावनाओं का निरंतर प्रचार करता है और देश के खिलाफ असंतोष पैदा करने के लिए एक विशेष वर्ग को कट्टरपंथी बना रहा है। यह संगठन आतंकी गतिविधियों को बढ़ा रहा है जो देश की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा के लिए हानिकारक है।
हब एंड स्पोक का नाता
गृहमंत्रालय ने कहा, पीएफआई और इन संगठनों के बीच हब एंड स्पोक का नाता है। पीएफआई इसमें हब है और वह सहयोगी संगठनों की पहुंच, चंदा जुटाने की क्षमताओं का इस्तेमाल कर गैर कानूनी गतिविधियों को अंजाम देता है।
मिलकर काम कर रहे आठों संगठन
रिहैब इंडिया फाउंडेशन पीएफआई सदस्यों के जरिये चंदा जुटाता है। पीएफआई के कुछ सदस्य कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, इंपावर इंडिया फाउंडेश और रिहैब फाउंडेशन केरल में भी सक्रिय हैं। जूनियर फ्रंट, ऑल इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन और नेशनल वूमेन फ्रंट की गतिविधियों की निगरानी पीएफआई करती है।
नृशंस हिंसा के साक्ष्य
कहीं प्रोफेसर के हाथ पैर काटे, कहीं दूसरे धर्म के लोगों की हत्या, अधिसूचना के मुताबिक पीएफआई के सदस्य बार-बार हिंसक कृत्यों में शामिल रहे हैं।
- कालेज प्रोफेसर के हाथ पैर काटने, दूसरे धर्म के संगठनों से जुड़े व्यक्तियों की हत्या करना शामिल है।
- मशहूर हस्तियों पर हमले करने, विभिन्न जगहों और सार्वजनिक संपत्तियों को नष्ट करने के लिए विस्फोटक जमा करने के भी साक्ष्य मिले। अधिसूचना में नृशंस गतिविधियों के शिकार कुछ लोगों के नाम हैं, जिनमें अधिकतर केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के थे।
संगठन के प्रमुख चेहरे
- ओएमए सलाम, अध्यक्ष- केरल राज्य विद्युत विभाग के कर्मचारी सलाम फिलहाल निलंबित हैं और उनके खिलाफ पीएफआई से जुड़े होने के कारण विभागीय जांच चल रही है। वह रिहैब इंडिया फाउंडेशन से भी जुड़े हैं।
- अनीस अहमद, राष्ट्रीय महासचिव- बंगलूरू से पढ़ाई करने वाले अहमद, संगठन की साइबर गतिविधियों को विस्तार देने में अहम भूमिका निभाते हैं। वह एक वैश्विक दूरसंचार कंपनी में काम करता है और फिलहाल निलंबित है। जांच एजेंसियों ने पाया कि अहमद सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव है।
- पी कोया, राष्ट्रीय कार्यकारी काउंसिल सदस्य- प्रतिबंधित सिमी का पूर्व सक्रिय सदस्य कोया 1986 में काम के लिए कतर चला गया था। तीन साल वहां एक निजी कंपनी में काम करने के बाद लौटा कोया कोझिकोड विश्वविद्यालय में लेक्चरर है। वह कोझिकोड की इस्लामिक यूथ सेंटर का निदेशक भी रहा।
- मोहम्मद शाकिब उर्फ शफीफ, राष्ट्रीय सचिव (मीडिया एवं जनसंपर्क)- शाकिब पीएफआई का संस्थापक सदस्य है। वह रियल एस्टेट का कारोबार करता है।
- ईएम अब्दुर रहीमन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष- रहीमन कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का सेवानिवृत्त लाइब्रेरियन है। वह सिमी का पूर्व अध्यक्ष रहा था। पीएफआई का एक प्रभावी नेता है और संगठन के बड़े फैसलों में उसकी अहम भूमिका रहती है।
- अफसर पाशा, राष्ट्रीय सचिव- पेशे से कारोबारी पाशा, 2006 में स्थापना के समय से पीएफआई का सक्रिय सदस्य है।
- मिनारुल शेख, पीएफआई पश्चिम बंगाल का अध्यक्ष- अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पीएचडी शेख अपनी कोचिंग चलाता है। वह संगठन के लिए रिसर्च का काम करता है।
- मोहम्मद आसिफ, अध्यक्ष पीएफआई राजस्थान- आसिफ कॉलेज में ही कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया में शामिल हो गया। कुछ दिन बाद राष्ट्रीय महासचिव भी बन गया। 2013-14 में प्रदेश उपाध्यक्ष बना दिया गया। वह बेहद सक्रिय है और प्रदेश में संगठन को विस्तार देने में उसकी अहम भूमिका है।