मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में नेशनल कोर्ट ऑफ अपील (सुप्रीम कोर्ट के समकक्ष) के गठन की गुहार संबंधित याचिका पर अब संविधान पीठ सुनवाई करेगी। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले को संविधान पीठ के पास भेज दिया है।
अदालत ने पाया कि इस मामले में संवैधानिक मसला हैं, लिहाजा बेहतर होगा कि इस याचिका पर सुनवाई संविधान पीठ करें। गत 28 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। केंद्र सरकार ने जहां इसके गठन का विरोध किया था वहीं अमाइकस क्यूरी(न्यायालय मित्र) वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल और टीआर अंध्यार्जुन ने इसके गठन का समर्थन किया था।
उचित मंच सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ नहीं बल्कि विधि आयोग है- अटॉर्नी जनरल
अटॉर्नी जनरल
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केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने नेशनल कोर्ट ऑफ अपील का गठन को खुद को परास्त करने वाली कवायद करार दिया। हालांकि उन्होंने कहा था कि सरकार इसके लिए बहस को तैयार है लेकिन उचित मंच पर। और उचित मंच सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ नहीं बल्कि विधि आयोग है।
उन्होंने कहा था कि इनके गठन से बेहतर होगा कि हाईकोर्ट को मजबूत बनाया जाए, जिससे कि सुप्रीम कोर्ट में फालतू की याचिकाएं न आने पाए। उन्होंने कहा था कि ऐसा करना असंवैधानिक होगा। उनका कहना था कि ऐसा करने केलिए संविधान के अनुच्छेद-136 में संशोधन करना होगा।
वहीं अमाइकस क्यूरी का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट का अधिकतर वक्त जमानत, वैवाहिक आदि मसलों पर सुनवाई में बर्बाद होता है। बेहतर होगा कि सुप्रीम कोर्ट संवैधानिक मसलों पर सुनवाई करें, जो उसका मूल काम है।
याचिका वी वसंत कुमार द्वारा दायर की गई है। याचिका में गुहार की गई है कि हाईकोर्ट केफैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं का निपटारा नेशनल कोर्ट ऑफ अपील की क्षेत्रीय पीठ द्वारा किया जाना चाहिए।