बलात्कार, गलत मंशा से पीछा करना (स्टॉकिंग), यौन उत्पीड़न मामले में महिलाओं को भी पुरुषों की तरह दंडित करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सामाजिक परिस्थितियों में बदलाव के साथ संसद कानून बनाता है। यह काम संसद पर छोड़ देना चाहिए।
वकील ऋषि मल्होत्रा की इस याचिका में कहा गया था कि बलात्कार, स्टॉकिंग आदि मामले में सिर्फ पुरुषों को ही क्यों निशाना बनाया जाता है, महिलाओं को क्यों नहीं? महिलाएं भी पुरुष का स्टॉकिंग कर सकती हैं। याचिकाकर्ता वकील का कहना था कि ये सभी कानून जेंडर-न्यूट्रल होना चाहिए।
वहीं
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ याचिकाकर्ताओं की दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई। पीठ ने याचिका खारिज कर दी। पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा, आपके कहने का मतलब है कि महिला भी पुरुष का स्टॉकिंग कर सकती है। इस पर संसद को विचार करना चाहिए।