बहुविवाह और निकाह-हलाला को असंवैधानिक घोषित करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दायर की गई है। बुलंदशहर की रहने वाली फरजाना द्वारा दायर इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस याचिका पर केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए इसे मुख्य मामले के साथ जोड़ दिया।
मालूम हो कि यह मसला संविधान पीठ केपास है, जिस पर सुनवाई होनी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में वरिष्ठ वकील विकास सिंह को अमाइकस क्यूरी नियुक्त किया है।
फरजाना की शादी 25 मार्च 2012 को मुस्लिम रीति रिवाजों के तहत अब्दुल कादिर से हुई थी। शादी केएक वर्ष बाद फरजाना को पति की पूर्व में हुई शादी का पता चला। इसकेबाद से पति-पत्नी में मनमुटाव रहने लगा।
फरजाना का आरोप है कि ससुरालियों द्वारा दहेज के लिए उसे प्रताड़ित किया जाना लगा। छोटी-छोटी बातों पर पति उसकी पिटाई करते थे। वर्ष 2014 में पति ने गैरकानूनी तरीके से तलाक(ट्रिपल तलाक) ले लिया। पिछले तीन वर्षों से फरजाना अपनी बेटी केसाथ अपने माता-पिता केसाथ रह रही है।
फरजाना ने अपनी याचिका में बहुविवाह और निकाह-हलाला को असंवैधानिक करार देने की गुहार की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ(शर्रियत), 1937 की धारा-दो को असंवैधानिक करार दिया जाना चाहिए क्योंकि यह मनमाना है। धारा-दो निकाह-हलाला और बहुविवाह को मान्यता देता है। साथ ही यह मौलिक अधिकारों (संविधान केअनुच्छेद-14, 15 और 21) के खिलाफ है।
मालूम हो कि निकाह-हलाला वह प्रथा है कि जिसके तहत तलाकशुदा महिला को अपने पति केसाथ पुन:वापस जाने के लिए पहले किसी दूसरे पुरुष से शादी करनी होती है और उसे तलाक देने के बाद उसे अपने पूर्व पति से निकाह करना पड़ता है। जबकि बहुविवाह मुस्लिम पुरुष को चार पत्नी रखने की इजाजत देता है।