चुनाव आयोग (ईसी) ने शनिवार को पांच राज्यों के चुनावी कार्यक्रम का एलान कर दिया। आयोग ने यह भी घोषणा की कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में 15 जनवरी तक कोई राजनीतिक दल चुनावी रैली नहीं करेगा। ईसी ने कहा कि इसके बाद वह देश में कोरोना की स्थिति को देखते हुए रैली की अनुमति देने पर फैसला करेगा। हालांकि, इस बीच देशभर में कराए गए एक सर्वे में सामने आया है कि 41 फीसदी लोग पूरे चुनाव में ही राजनीतिक रैलियों पर प्रतिबंध के पक्ष में हैं।
इतना ही नहीं सर्वे में यह भी कहा गया है कि कोरोना की तीसरी लहर के चलते 31 फीसदी नागरिक पांचों राज्यों में चुनाव टालने के पक्ष में थे। सर्वे में सिर्फ राजनीतिक दलों की रैलियों पर प्रतिबंध लगाने का ही समर्थन नहीं किया गया, बल्कि प्रतिक्रिया देने वाले 24 फीसदी लोगों ने यह भी कहा कि कोरोना की गाइडलाइंस के पालन के साथ रैलियों को जारी रहने देना चाहिए।
चुनावी रैलियों पर नहीं होनी चाहिए कार्रवाई, जानें कितने लोगों ने कहा ऐसा
सर्वे में करीब चार फीसदी लोग ऐसे भी थे, जिनका कहना था कि चुनाव के कारण कोरोना के फैलने का खतरा काफी कम है और इसलिए चुनावी रैलियों पर कोई प्रतिबंध नहीं होना चाहिए।
बताया गया है कि यह सर्वे डिजिटल कम्युनिटी बेस्ड प्लेटफॉर्म लोकल सर्किल्स (Local Circles) की ओर से कराया गया। सर्वे को चुनाव आयोग के एलान के बाद कराए जाने की बात भी कही गई है। इसमें देश के 309 जिलों से 11 हजार लोगों की प्रतिक्रियाएं दर्ज की गईं। इनमें 4172 प्रतिक्रियाएं पांच चुनावी राज्य से आने वाले लोगों की भी रहीं। सर्वे में प्रतिक्रिया देने वाले 68 फीसदी पुरुष और 32 फीसदी महिलाएं शामिल रहीं।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग के एलान के बाद से ही ज्यादातर राजनीतिक दलों ने रैलियों पर प्रतिबंधों का स्वागत किया। हालांकि, कांग्रेस समेत छोटे स्थानीय दलों ने आग्रह किया है कि उन्हें कोरोना महामारी के बीच प्रचार के लिए बराबरी का मौका मिलना चाहिए।