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चेन्नई में 46 लाख लोगों को नहीं मिल रहा पानी, प्रदर्शन कर रहे 500 लोग गिरफ्तार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Wed, 19 Jun 2019 10:34 AM IST

सार

  • आईटी कंपनियों ने कहा- कर्मचारी घर पर रहकर ही ऑफिस का काम निपटाएं 
  • प्राइवेट टैंकर के पानी का रेट 6 हजार रुपए तक पहुंचा, एक हफ्ते तक वेटिंग 
  • मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा
  • पानी का संकट: चेन्नई के 4 बड़े जलाशयों में 0.2% पानी बचा, शहर में टोकन सिस्टम से टैंकरों से बंट रहा पानी 
  • जल संकट से 9 होटल बंद, फाइव स्टार होटल रेडिसन ने कहा- मेहमान पानी बचाने में मदद करें
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चेन्नई में पानी का संकट - फोटो : ANI


जल संकट से चेन्नई के 46 लाख से ज्यादा लोगों को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि दक्षिणी इलाके में एक बाल्टी पानी के लिए लोगों को 3 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। हिंसा के बाद यहां नगर निगम टोकन से पानी बांट रहा है। प्राइवेट मालिक प्रति टैंकर 4000 रु. से 6000 रुपए तक वसूल रहे हैं। उसके लिए एक हफ्ते तक की वेटिंग चल रही है। चेन्नई में पल्लावरम समेत 5 उपनगरों में टैंकर पानी के टोकन बांटे जा रहे हैं।

196 दिन बाद चेन्नई में हुई उम्मीदों की बारिश 

  • गर्मी और सूखे के बीच चेन्नई के लिए गुरुवार का दिन उम्मीद भरा रहा। वहां दोपहर 3 बजे पांच उपनगरों में 196 दिन बाद बारिश हुई, जो करीब आधा घंटे चली। 
  • मौसम विभाग के अनुसार, अगले 4 दिन में चेन्नई में कई जगह रिमझिम बारिश होने की उम्मीद है। 
  • केरल ने दावा किया कि उसने ट्रेन से 20 लाख लीटर पानी पहुंचाने की पेशकश की, पर तमिलनाडु ने ठुकरा दी। हालांकि तमिलनाडु सरकार ने कहा कि इस पर विचार चल रहा है।


नहाने तक के लिए पानी नहीं मिल रहा एक स्थानीय महिला का कहना है, "हमें नहाने तक के लिए पानी नहीं मिल रहा है। मेरा बेटा ऑफिस जाता है और कॉलेज के बाद बेटी घर पे होती है। मैं भी काम करती हूं। पानी ही नहीं है।"


यहां के एक रेस्त्रां ने पानी की कमी के चलते दोपहर का खाना परोसना बंद कर दिया है। रेस्त्रां के मेनेजर का कहना है कि उन्हें पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, यही वजह है कि भोजन परोसना बंद कर दिया गया है। 


अब शहर के लोग निजी पानी के टैंकों पर निर्भर हैं। इनके दाम भी बढ़ा दिए गए हैं लेकिन बावजूद इसके ये भी समय पर पानी उपलब्ध नहीं कर रहे हैं। ऑफिस जाने वाले सईद अल्ताफ का कहना है, "ये हमारे लिए बड़ी चुनौती है। पानी हमारे उद्योग की रीढ़ है। चेन्नई परेशानी में है। पहले महज एक कॉल पर हमें उसी रात पानी मिल जाया करता था, लेकिन दुर्भाग्य से अब इसमें चार दिनों का समय लग रहा है।"


नेशनल वॉटर अकेडमी के पूर्व निदेशक मनोहर खुशालिनी का कहना है, "2015 में, चेन्नई में बाढ़ आई थी। जिस वजह से बाढ़ आई अब उसी वजह से सूखा आया है। जलाशयों और नहरों को ठीक किया जाना चाहिए।"

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