संजय राउत ने कहा, जापानी शहर पर हमले के परिणामस्वरूप लोगों की मौत हुई थी, इस्राइली सॉफ्टवेयर द्वारा जासूसी के कारण 'आजादी की मौत' हो रही है। इस बीच रिटायर्ड आईपीएस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के कैडर अधिकारियों से जब इस प्रकरण के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब देने की बजाए सवाल कर दिया। वे कहते हैं, सरकार चाहे किसी की भी हो, 'पोस्ट रिटायरमेंट जॉब' कब और क्यों दी जाती है। क्यों उस अफसर ने देश के लिए बहुत अच्छा काम किया है या व्यवस्था को सरकार की पसंद के अनुरुप बनाया है। आईबी व रॉ प्रमुख को पोस्ट रिटायरमेंट जॉब मिलती है, एक्सटेंशन भी मिल जाता है। कुछ तो खास रहा होगा।
पूर्व आईपीएस और कैडर अधिकारी इस प्रकरण में कई बातें शामिल करते हैं। नाम न लिखने की शर्त पर उन्होंने कहा, ऐसा हो ही नहीं सकता कि कोई एजेंसी या उसका अधिकारी ऐसे प्रकरण में शामिल न हो। उन्होंने कहा कि फोन टैपिंग के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं और इनको लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे हैं। शक्तियों का दुरुपयोग होता आया है। हालांकि 'पेगासस स्पाईवेयर' में जासूसी को लेकर कुछ बाकी नहीं रह जाता। जिस व्यक्ति के फोन पर इसका अटैक होता है, ये समझ लें कि उस फोन में क्या है क्या नहीं, यह जानकारी उस व्यक्ति को नहीं होती, लेकिन पेगासस सॉफ्टवेयर में होती है।
कांग्रेस पार्टी के अलावा सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत भूषण और सांसद संजय राउत भी यह सवाल उठा रहे हैं कि पेगासस जासूसी तो बहुत महंगी है, इसके लिए फंड कहां से आया है। हालांकि प्रशांत भूषण ने कह दिया है कि 2016-17 में 'एनएसए' का बजट 33.17 करोड़ रुपये था। अगले साल वह बजट 333 करोड़ हो गया। ये वही साल था, जब एनएसओ को कुछ लोगों की साइबर हैकिंग करने के लिए सौ करोड़ रुपये दिए गए थे।
पूर्व आईपीएस और सीएपीएफ के रिटायर्ड कैडर अधिकारी बताते हैं, आखिर रॉ और आईबी के प्रमुखों को सरकार इतनी ज्यादा वरीयता क्यों देती है। इन्हें एक्सटेंशन भी दिया जा रही है और सेवा विस्तार भी मिल रहा है। प्रशांत भूषण और कांग्रेस पार्टी ने साल 2017 को लेकर कुछ इशारा किया है। दिसंबर 2016 में रॉ के नए सेक्रेट्री यानी प्रमुख के नाम की घोषणा की गई थी। अनिल धस्माना एक जनवरी 2017 से नए रॉ चीफ बने थे। इसके साथ ही राजीव जैन को आईबी निदेशक बनाया गया था। इन दोनों अधिकारियों को छह माह का एक्सटेंशन भी दिया गया। रिटायरमेंट के बाद राजीव जैन पिछले दिनों राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य बनाए गए हैं। रॉ चीफ रहे अनिल धस्माना को सेवानिवृत्ति के बाद एनटीआरओ प्रमुख की कमान सौंप दी गई है। मौजूदा रॉ चीफ सामंत गोयल और आईबी चीफ अरविंद कुमार को इसी साल एक एक साल का एक्सटेंशन दे दिया गया है।
अधिकारी का कहना है कि आखिर ये पोस्ट रिटायरमेंट पद या सेवा विस्तार कैसे मिल जाता है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इन एजेंसियां के कामकाज के बारे में ज्यादा खुलासा नहीं करना चाहिए। जो समझ सकता है, वह समझ ले। राउत ने शिवसेना के मुखपत्र सामना में अपने साप्ताहिक कॉलम 'रोखठोक' में कहा, 'आधुनिक तकनीक ने हमें फिर से गुलामी में ले लिया है'। पेगासस मामला 'हिरोशिमा पर परमाणु बम हमले से अलग नहीं है'। राजनेताओं, उद्योगपतियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को डर है कि उनकी जासूसी की जा रही है। यहां तक कि न्यायपालिका और मीडिया भी उसी दबाव में हैं। राष्ट्रीय राजधानी में आजादी का माहौल कुछ साल पहले खत्म हो गया था।
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि पेगासस द्वारा कथित जासूसी के लिए किसने भुगतान किया। एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस्राइल की कंपनी एनएसओ पेगासस सॉफ्टवेयर के लिए लाइसेंस (फीस) के रूप में सालाना 60 करोड़ रुपये वसूलती है। एक लाइसेंस से 50 फोन हैक किए जा सकते हैं। इसलिए, 300 फोन टैप करने के लिए छह से सात लाइसेंस की आवश्यकता होती है। इतना पैसा खर्च किया गया है। इसके लिए किसने भुगतान किया। भारत में किस सरकार ने यह सॉफ्टवेयर खरीदा है। भारत में 300 लोगों की जासूसी के लिए 300 करोड़ रुपये खर्च किए गए। क्या ऐसा है। राउत ने पूछा, हमारे देश में जासूसी पर इतना पैसा खर्च करने की क्षमता है।